

🌙 महाशिवरात्रि: भीतर के अंधकार से संवाद
पोल खोल न्यूज़ डेस्क

महाशिवरात्रि भारतीय संस्कृति का ऐसा आध्यात्मिक पर्व है, जो केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का अवसर प्रदान करता है। यह वह रात्रि है जब साधक बाहरी जगत से हटकर अपने भीतर की यात्रा करता है। भगवान शिव का स्मरण केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन को समझने का माध्यम है।
शिव का स्वरूप विरोधाभासों का अद्भुत संतुलन है—वैरागी भी और गृहस्थ भी, संहारक भी और कल्याणकारी भी। यही संतुलन हमें सिखाता है कि जीवन में कठोरता और करुणा, दोनों का संतुलित होना आवश्यक है। महाशिवरात्रि हमें यह समझने का अवसर देती है कि परिवर्तन से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि हर अंत एक नई शुरुआत का संकेत होता है।
आज की भागदौड़ भरी दुनिया में मनुष्य उपलब्धियों के पीछे दौड़ रहा है, लेकिन मानसिक शांति उससे दूर होती जा रही है। ऐसे समय में शिव का योगी रूप हमें भीतर की स्थिरता खोजने का संदेश देता है। उनका मौन यह बताता है कि हर प्रश्न का उत्तर बाहर नहीं, भीतर मिलता है।
महाशिवरात्रि की रात्रि जागरण का प्रतीक है—पर यह जागरण केवल आंखों का नहीं, बल्कि चेतना का है। यह पर्व हमें अपने विचारों, भावनाओं और कर्मों का मूल्यांकन करने का अवसर देता है। यह याद दिलाता है कि सच्ची भक्ति आत्मसंयम, सहनशीलता और उत्तरदायित्व से जुड़ी है।
युवा पीढ़ी के लिए महाशिवरात्रि विशेष रूप से प्रासंगिक है। प्रतिस्पर्धा, तुलना और डिजिटल जीवन के दबाव के बीच यह पर्व संतुलन और आत्मविश्वास का संदेश देता है। शिव-तत्त्व अपनाने का अर्थ है—साहस के साथ संयम, गति के साथ लय और सपनों के साथ स्थिरता।
🕉️ महाशिवरात्रि से मिलने वाले प्रमुख संदेश
🔹 परिवर्तन जीवन का स्वाभाविक नियम है, उसे स्वीकार करना ही विकास है।
🔹 मौन और ध्यान मानसिक स्पष्टता प्रदान करते हैं।
🔹 अहंकार का त्याग ही सच्ची आध्यात्मिकता है।
🔹 संतुलन के बिना शक्ति भी विनाशकारी हो सकती है।
🔹 आत्मसंयम और विवेक ही स्थायी सफलता की कुंजी हैं।
🔹 बाहरी प्रकाश से अधिक, भीतर की जागरूकता महत्वपूर्ण है।
महाशिवरात्रि हमें बाहरी अंधकार से अधिक, अपने भीतर के अज्ञान और अस्थिरता को पहचानने का संदेश देती है। यह पर्व केवल परंपरा का निर्वाह नहीं, बल्कि आत्मबोध की यात्रा है। यदि हम शिव के संदेश—संतुलन, करुणा और साहस—को जीवन में उतार लें, तो व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों स्तरों पर सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
लेखक:
राजन कुमार शर्मा
गांव व डाकघर डुगली,
उप-तहसील लंबलू, जिला हमीरपुर

Author: Polkhol News Himachal









