

डंके की चोट पर : हिमाचल में मानव तस्करी की आहट, झारखंड कनेक्शन से खुली परतें, गुमशुदगी के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
रजनीश शर्मा। हमीरपुर

महिला पुलिस थाना हमीरपुर में दर्ज मानव तस्करी मामले में कई खुलासे हो रहे हैं। अब तक दो नाबालिग बच्चियां रेस्क्यू की जा चुकी है जब की दो आरोपी गिरफ्तार कर पुलिस रिमांड पर लिए गए हैं । सारे मामले का कनेक्शन अचानक बच्चों-बुजुर्गों के गायब होने के मामलों से भी जुड़ रहा है।
झारखंड से लाए गए पांच लोग, वापसी के नाम पर वसूली
हमीरपुर में हाल ही में सामने आए मामले में पुलिस ने खुलासा किया कि झारखंड से पांच लोगों को काम दिलाने के नाम पर हिमाचल लाया गया था। इनमें दो नाबालिग बच्चियां शामिल थीं। जांच में सामने आया कि वापसी के नाम पर परिजनों से पैसों की मांग की जा रही थी। चाइल्ड हेल्पलाइन की सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने बच्चियों को रेस्क्यू कर मंडी स्थित शेल्टर होम भेज दिया। दो आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया है, जबकि तीसरे की तलाश जारी है।

मानव तस्करी का एंगल: रोजगार का झांसा, फिर सौदेबाजी
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि गरीब परिवारों को रोजगार, पढ़ाई या बेहतर भविष्य का लालच देकर बच्चों को दूसरे राज्यों में भेजा जाता है। बाद में मजदूरी, घरेलू काम या अन्य कार्यों में लगाकर उनकी कमाई का हिस्सा रखा जाता है या घर वापसी के नाम पर रकम मांगी जाती है।
जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि क्या यह मामला किसी बड़े अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़ा है। दिल्ली तक पुलिस टीम भेजी गई है ताकि नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा सकें।
अचानक बच्चों और बुजुर्गों के गायब होने के मामले
प्रदेश में बीते कुछ वर्षों में बच्चों और बुजुर्गों के अचानक गायब होने की घटनाओं ने चिंता बढ़ाई है। कई मामलों में पारिवारिक विवाद, मानसिक स्वास्थ्य या घर छोड़कर चले जाना कारण पाया गया, लेकिन कुछ मामलों में लंबे समय तक कोई सुराग नहीं मिला।
विशेषज्ञ मानते हैं कि जिन मामलों में नाबालिग या कमजोर वर्ग के लोग लंबे समय तक ट्रेस नहीं होते, वहां मानव तस्करी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
हिमाचल में गुमशुदगी का आधिकारिक परिदृश्य
पुलिस मुख्यालय के उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:
- वर्ष 2023 में हिमाचल प्रदेश में लगभग 3,000 से अधिक गुमशुदगी के मामले दर्ज हुए।
- इनमें से करीब 60–65% मामले नाबालिगों से जुड़े थे।
- बुजुर्गों की गुमशुदगी के मामलों का प्रतिशत कम है, लेकिन रिकवरी रेट अपेक्षाकृत धीमा रहता है।
- पुलिस का दावा है कि 85–90% मामलों में ट्रेसिंग/रिकवरी हो जाती है, लेकिन शेष मामलों की लंबी जांच जारी रहती है।
जांच एजेंसियों की चुनौती: इंटर-स्टेट नेटवर्क
मानव तस्करी के मामलों में सबसे बड़ी चुनौती अंतरराज्यीय नेटवर्क को तोड़ना है। झारखंड, बिहार, ओडिशा जैसे राज्यों से हिमाचल, दिल्ली या अन्य क्षेत्रों में मजदूरी और घरेलू कार्य के नाम पर लोगों को लाने के पैटर्न की जांच की जा रही है।
इस मामले में भी पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या आरोपी किसी बड़े गिरोह से जुड़े हैं और क्या पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं।
सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि: क्यों बनते हैं आसान शिकार
विशेषज्ञों के अनुसार—
- अत्यधिक गरीबी
- शिक्षा की कमी
- रोजगार के सीमित अवसर
- और परिवारों का बाहरी लोगों पर भरोसा
इन कारणों से बच्चे और महिलाएं तस्करी के जाल में फंस जाते हैं।
इन्फो बॉक्स: मानव तस्करी और गुमशुदगी—मुख्य तथ्य
➤ मानव तस्करी क्या है?
किसी व्यक्ति को धोखे, लालच या दबाव से एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाकर शोषण करना।
➤ सबसे संवेदनशील वर्ग:
नाबालिग बच्चे, अकेले बुजुर्ग, गरीब परिवारों की महिलाएं।
➤ हिमाचल में स्थिति:
- हर साल हजारों गुमशुदगी दर्ज
- अधिकांश मामले ट्रेस, पर कुछ अब भी लंबित
- अंतरराज्यीय मूवमेंट पर विशेष निगरानी
➤ क्या करें?
- संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत 112 या 1098 (चाइल्ड हेल्पलाइन) पर सूचना दें
- बच्चों को नौकरी/शिक्षा के नाम पर भेजने से पहले सत्यापन करें
- स्थानीय पुलिस में गुमशुदगी तुरंत दर्ज कराएं
निष्कर्ष: एक केस, कई सवाल
हमीरपुर का यह मामला सिर्फ एक एफआईआर तक सीमित नहीं है। यह उन सवालों को सामने लाता है जो हिमाचल में गुमशुदगी और मानव तस्करी के संभावित नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं।
जांच एजेंसियों के सामने चुनौती है—क्या यह अलग-थलग घटना है या किसी बड़े संगठित गिरोह की कड़ी? आने वाले दिनों में पुलिस की जांच इस रहस्य से पर्दा उठाएगी।

Author: Polkhol News Himachal










