

हिमाचल की चार हिमनद झीलों पर जीएलओएफ का खतरा, सैटेलाइट आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित होगा
पोल खोल न्यूज़ | कुल्लू

हिमाचल प्रदेश के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित चार हिमनद झीलों को ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) के संभावित जोखिम के मद्देनज़र उच्च खतरे की श्रेणी में रखा गया है। केंद्र सरकार ने इन झीलों की निगरानी के लिए सैटेलाइट आधारित अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) द्वारा चिन्हित झीलों में कुल्लू जिले की पार्वती घाटी स्थित वासुकी झील, लाहौल-स्पीति की गिपांग झील तथा किन्नौर जिले की सांगला घाटी की बास्पा और काशंग क्षेत्र की कलका झील शामिल हैं। इन झीलों के फटने की स्थिति में जल प्रवाह पार्वती, चंद्रा और सतलुज नदी तंत्र में प्रवेश कर निचले क्षेत्रों में व्यापक नुकसान पहुंचा सकता है।
प्रस्तावित अर्ली वार्निंग सिस्टम झीलों के जलस्तर, ग्लेशियर की संरचनात्मक गतिविधियों और अन्य असामान्य परिवर्तनों की निरंतर निगरानी करेगा। किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में मौसम विभाग और जिला प्रशासन को त्वरित अलर्ट जारी किया जाएगा, जिससे राहत एवं बचाव कार्य समय रहते प्रारंभ किए जा सकें।
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विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से हिमनदों के तीव्र पिघलाव के कारण झीलों का आकार बढ़ रहा है, जिससे जीएलओएफ की आशंका में वृद्धि हुई है। एनडीएमए ने देशभर में 7,500 से अधिक हिमनद झीलों में से 195 को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में चिन्हित किया है, जिनमें हिमाचल की ये चार झीलें भी शामिल हैं।
📌 इन्फो बॉक्स
- राज्य में चिन्हित झीलें: 4
- जोखिम श्रेणी: उच्च (GLOF संभावित)
- राष्ट्रीय स्तर पर उच्च जोखिम झीलें: 195
- निगरानी तंत्र: सैटेलाइट आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम
- संभावित प्रभाव क्षेत्र: पार्वती, चंद्रा व सतलुज बेसिन

Author: Polkhol News Himachal










