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राजा साहब का युग : हिमाचल की अर्थव्यवस्था, विकास और वित्तीय अनुशासन की मजबूत नींव

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राजा साहब का युग : हिमाचल की अर्थव्यवस्था, विकास और वित्तीय अनुशासन की मजबूत नींव

हिमाचलियत का प्रहरी, विकास का सूत्रधार

रजनीश शर्मा। हमीरपुर

हिमाचल प्रदेश के छह बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह केवल सत्ता के शिखर तक सीमित नेता नहीं थे, बल्कि हिमाचलियत, देव-परंपरा और जनभावनाओं के सच्चे प्रतिनिधि थे। केंद्रीय नेतृत्व से टकराने का साहस हो या प्रदेश के हितों के लिए अडिग रहना—‘राजा साहब’ ने कभी समझौते की राजनीति नहीं की। गुटबाजी से दूरी और बहानेबाजी से सख्त नफरत उनके प्रशासन की पहचान रही।

आर्थिक सोच: संतुलन, साहस और स्थिरता

वीरभद्र सिंह युग में हिमाचल की आर्थिक नीति का मूल मंत्र था—विकास के साथ वित्तीय संतुलन। सीमित संसाधनों वाले पहाड़ी राज्य में उन्होंने व्यावहारिक फैसले लिए, जिससे योजनाएं कागज़ से निकलकर ज़मीन पर उतरीं। केंद्र से संसाधन लाने में दृढ़ता और राज्य के हितों पर स्पष्ट रुख ने हिमाचल की वित्तीय स्थिरता को मजबूती दी।

विकास की धुरी: सड़क, शिक्षा और पर्यटन

उनके कार्यकाल में सड़कों का जाल बिछा, दूर-दराज़ के गांव मुख्यधारा से जुड़े और पर्यटन को नई पहचान मिली। शिक्षा संस्थानों के विस्तार ने मानव संसाधन को सशक्त किया। यह वही दौर था जब आधुनिक हिमाचल की नींव रखी गई—जहां बुनियादी ढांचा, रोज़गार और क्षेत्रीय संतुलन साथ-साथ आगे बढ़े।

वित्तीय अनुशासन: कड़ाई भी, करुणा भी

राजा साहब प्रशासनिक अनुशासन के पक्षधर थे। खर्च में संयम, योजनाओं में प्राथमिकता और जवाबदेही—इन तीन स्तंभों पर उनकी वित्तीय नीति टिकी रही। उन्होंने दिखाया कि कठोर फैसले भी जनहित में हों तो स्वीकार्य बनते हैं। यही कारण रहा कि आर्थिक अनुशासन के बावजूद जनकल्याण प्रभावित नहीं हुआ।

जननेता की पहचान: कुर्सियों से आगे दिलों तक

6 बार मुख्यमंत्री, 9 बार विधायक और 5 बार सांसद रहने के बावजूद उनकी लोकप्रियता सत्ता तक सीमित नहीं रही। विनम्रता, शालीनता और हर वर्ग से संवाद ने उन्हें विपक्ष में भी सम्मान दिलाया। हिमाचल की संस्कृति और देव परंपरा के प्रति उनका समर्पण उन्हें विशिष्ट बनाता है।

विरासत: नीति, नीयत और निडरता

वीरभद्र सिंह का युग यह प्रमाण है कि मजबूत नीयत, स्पष्ट नीति और निडर नेतृत्व से ही पहाड़ी राज्य सतत विकास कर सकता है। उनकी विरासत केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि सड़कों, संस्थानों, पर्यटन स्थलों और सबसे बढ़कर लोगों के विश्वास में जीवित है।

राजा साहब का जीवन और शासन बताता है कि सच्चा जननेता वही है जो सत्ता से नहीं, जनविश्वास से इतिहास रचता है—और हिमाचल में यह अध्याय आज भी स्वर्णाक्षरों में दर्ज है।

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