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डंके की चोट पर : आर्थिक संकट का रोना, लेकिन खर्च बेलगाम , मंत्री-विधायकों का वेतन 24% बढ़ा, निगम-बोर्ड अध्यक्षों का 5 गुना

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डंके की चोट पर : आर्थिक संकट का रोना, लेकिन खर्च बेलगाम , मंत्री-विधायकों का वेतन 24% बढ़ा, निगम-बोर्ड अध्यक्षों का 5 गुना

रजनीश शर्मा। हमीरपुर 

हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को कमजोर बताते हुए सरकार जहां आम जनता से संयम, सहयोग और त्याग की अपील कर रही है, वहीं सत्ता से जुड़े पदों पर खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में वित्तीय संकट की दुहाई दी जा रही है, लेकिन फैसले इसके बिल्कुल उलट लिए जा रहे हैं।


मंत्री-विधायक मालामाल, जनता बेहाल

राज्य सरकार ने मंत्री-विधायकों के वेतन-भत्तों में 24 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है। यही नहीं, निगम-बोर्ड के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों का मानदेय पांच गुना तक बढ़ा दिया गया, जबकि प्रदेश पहले से ही कर्ज़ और घाटे के बोझ तले दबा हुआ है।


सलाहकारों पर लाखों की बारिश, न जवाब न हिसाब

सरकार द्वारा नियुक्त सलाहकारों को हर माह 2.50 लाख रुपये तक वेतन दिया जा रहा है। इसके साथ उन्हें

  • सरकारी वाहन
  • चालक
  • आवास भत्ता
  • चिकित्सा सुविधा
  • यात्रा भत्ता

जैसी तमाम सुविधाएं अलग से मिल रही हैं। सवाल यह है कि आखिर 2.50 लाख रुपये महीना किस “सलाह” के लिए दिया जा रहा है? न तो सलाह सार्वजनिक है, न ही उसके परिणाम ज़मीन पर दिखाई देते हैं।


75 से ज्यादा महाधिवक्ता, खर्च लाखों में

वित्तीय तंगी के दौर में सरकार ने 75 से अधिक अतिरिक्त, उप और सहायक महाधिवक्ताओं की नियुक्ति कर दी है। इन पर हर माह लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। विपक्ष और विशेषज्ञों का कहना है कि यह सीधा-सीधा सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ है।


कॉस्ट कटिंग गरीब से, ऐश सत्ता से

आलोचकों का आरोप है कि कॉस्ट कटिंग के नाम पर आम आदमी, कर्मचारी और पेंशनरों की जेब पर कैंची चलाई जा रही है, जबकि सत्ता से जुड़े खर्चों पर कोई अंकुश नहीं है। कर्मचारी और पेंशनर आज भी एरियर और डीए का इंतजार करते-करते थक चुके हैं।


वित्त विभाग कटघरे में: सवा तीन साल क्या करता रहा?

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा किए जा रहे “व्यवस्था परिवर्तन” और आर्थिक सुधारों के दावों की हवा वित्त विभाग ने ही निकाल दी है।
अगर आज वित्त विभाग सांप निकल जाने के बाद लकीर पीट रहा है, तो सवाल यह है कि पिछले सवा तीन साल तक वित्त विभाग क्या करता रहा?


अब फिजूलखर्ची पर लगाम जरूरी

प्रदेश की वित्तीय सेहत सुधारनी है तो

  • कैबिनेट रैंक वाले सलाहकारों की फौज को घर बैठाने
  • मंत्रियों के दौरों में सरकारी गाड़ियों के काफिले छोटे करने
  • राजनीतिक नियुक्तियों पर रोक लगाने

का वक्त आ चुका है। पहले सरकार अपनी फिजूलखर्ची पर लगाम लगाए, तभी वित्तीय संकट से उबरने की शुरुआत संभव है।


📌 इन्फो बॉक्स

📊 हिमाचल की वित्तीय हकीकत

  • मंत्री-विधायकों का वेतन: 24% बढ़ोतरी
  • निगम-बोर्ड अध्यक्ष/उपाध्यक्ष: मानदेय 5 गुना
  • सलाहकारों का वेतन: 2.50 लाख रुपये प्रतिमाह तक
  • अतिरिक्त/उप/सहायक महाधिवक्ता: 75 से ज्यादा
  • कर्मचारी-पेंशनर: डीए व एरियर लंबित

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