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Himachal News: हिमाचल प्रदेश के बजट में आरडीजी का 13% तक रहा योगदान,

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Himachal News: हिमाचल प्रदेश के बजट में आरडीजी का 13% तक रहा योगदान

पोल खोल न्यूज़ । शिमला 


हिमाचल प्रदेश के बजट को तैयार करने का सबसे बड़ा दारोमदार राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) का रहा है। हिमाचल देश का ऐसा दूसरा राज्य है, जो नगालैंड के बाद बजट बनाने के लिए आरडीजी पर निर्भर है। हिमाचल के बजट का 13 फीसदी हिस्सा आरडीजी का रहा है। अन्य 15 राज्यों के बजट में बहुत कम हिस्सा आरडीजी का रहता है। इन राज्यों के पास आय के अन्य साधन हैं। प्रधान सचिव देवेश कुमार ने अपनी प्रस्तुति में इस पर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि बहुत सी योजनाओं के लिए सरकार बजट नहीं दे पाएगी।

रविवार को अपनी प्रस्तुति के दौरान देवेश कुमार ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 275 (1) उन राज्यों को अनुदान प्रदान करने का प्रावधान करता है, जो अपनी राजस्व प्राप्तियों और व्यय के बीच की खाई को पाटने में सक्षम नहीं हैं। इस अनुच्छेद के अनुसार राजस्व घाटा अनुदान दिया जाता है। वित्त आयोग के समक्ष बार-बार प्रस्तुति दी गई। मुख्यमंत्री स्वयं कई बार नई दिल्ली गए और केंद्रीय वित्त मंत्री व वित्त आयोग से मिले।

राज्य की भौगोलिक परिस्थितियां ऐसी हैं कि हिमाचल प्रदेश में विभिन्न सुविधाएं देने के लिए कर्मचारियों की संख्या अधिक रखना जरूरी है और इससे खर्च भी ज्यादा आता है। देवेश कुमार ने कहा कि राज्य में वनों को दृष्टिगत रखते हुए मदद मांगी गई। पहली बार खुले वन क्षेत्र के लिए कुछ आवंटन किया गया है। इसके अलावा भूस्खलन को भी केंद्र से मिलने वाली आपदा राहत में शामिल किया गया है, जो पहले नहीं था।

केंद्रीय करों में मामूली बढ़ोतरी

प्रधान सचिव ने बताया कि केंद्रीय करों में हिमाचल की हिस्सेदारी में मात्र 0.084 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। 15वें वित्त आयोग ने हिमाचल को 37,199 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान दिया था। कोविड वर्ष में 11,431 करोड़ रुपये की अंतरिम राहत भी मिली। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के बाद से अब तक सभी वित्त आयोगों ने आरडीजी की सिफारिश की, लेकिन केवल 16वें वित्त आयोग ने इसे बंद कर दिया है।

15वें वित्त आयोग की गणना

देवेश कुमार ने बताया कि 15वें वित्त आयोग ने 2021-26 की अवधि में हिमाचल के लिए राजस्व 90,760 करोड़ और व्यय 1,70,930 करोड़ रुपये आंका था। 80,170 करोड़ रुपये के घाटे की पूर्ति के लिए 35,064 करोड़ कर हस्तांतरण, 37,199 करोड़ आरडीजी और 9,714 करोड़ अन्य अनुदानों का अनुमान लगाया गया था। हालांकि 4,407 करोड़ रुपये के अन्य अनुदान स्वीकार नहीं किए गए।

16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट में इस तरह का कोई स्पष्ट आकलन या गणना उपलब्ध नहीं है।

आने वाली सरकारों पर भी पड़ेगा असर

प्रधान सचिव वित्त ने कहा कि आरडीजी बंद करने का असर केवल मौजूदा सरकार पर नहीं, बल्कि आने वाली सरकारों पर भी पड़ेगा। वित्त वर्ष 2026-27 में विकास कार्यों और योजनाओं को छोड़कर लगभग 6000 करोड़ रुपये का संसाधन अंतर पैदा हो गया है। उन्होंने इसे हिमाचल प्रदेश के लोगों के साथ घोर अन्याय बताया।

टैक्स बढ़ाने की भी सीमा

देवेश कुमार ने कहा कि राज्य में शराब और सीमेंट पर सेस लगाया गया है, लेकिन इसकी भी एक सीमा है। ज्यादा कर लगाने पर लोग बाहरी राज्यों से इन वस्तुओं की खरीद करते हैं। भू-राजस्व पर सेस लगाकर राजस्व बढ़ाने की उम्मीद जताई गई।

सचिवालय और ओकओवर में चर्चा

प्रधान सचिव की प्रस्तुति के बाद सचिवालय और ओकओवर में आरडीजी पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री सुक्खू, मंत्री, विधायक और अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान कई लोगों ने अपनी राय रखी।

पीपीटी न चलने पर सीएम नाराज

प्रस्तुति के दौरान स्क्रीन पर पीपीटी न चलने पर मुख्यमंत्री सुक्खू नाराज हो गईं। उन्होंने आईटी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि तकनीकी जांच पहले क्यों नहीं की जाती।

कैबिनेट लेगी अंतिम फैसला

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट पर वित्त विभाग ने केवल सुझाव दिए हैं। इस पर अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल करेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कल्याणकारी योजनाएं जारी रहेंगी और आम जनता पर अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा।

📌 इन्फो बॉक्स

🔹 हिमाचल बजट और आरडीजी से जुड़े अहम तथ्य

🔸 बजट में आरडीजी की हिस्सेदारी: लगभग 13%

🔸 आरडीजी पर निर्भर राज्य: नगालैंड के बाद हिमाचल

🔸 15वें वित्त आयोग से आरडीजी: ₹37,199 करोड़

🔸 कोविड अंतरिम राहत: ₹11,431 करोड़

🔸 2026-27 में अनुमानित संसाधन अंतर: ₹6000 करोड़

🔸 16वें वित्त आयोग में आरडीजी: शून्य

🔸 भूस्खलन अब आपदा राहत में शामिल

🔸 खुले वन क्षेत्र के लिए पहली बार आवंटन

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