
हाईकोर्ट के अहम फैसले: दुष्कर्म आरोपी की जमानत बरकरार, कई मामलों में सरकार को झटका
पोल खोल न्यूज़ | शिमला

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी की जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह की अदालत ने कहा कि जमानत रद्द करने के लिए असाधारण परिस्थितियों की आवश्यकता होती है, जो इस मामले में मौजूद नहीं हैं। अदालत ने यह भी माना कि एक ओर पीड़िता जमानत रद्द कराने की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर आरोपी से अपने और बच्चे के भरण-पोषण की मांग करना एक विरोधाभासी स्थिति है। कोर्ट ने इसे “जटिल मानवीय संबंधों का उदाहरण” बताया।

अदालत ने पुलिस की रिपोर्ट और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए पाया कि आरोपी द्वारा जमानत शर्तों के उल्लंघन का कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया। ऐसे में जमानत रद्द करने का आधार नहीं बनता।
नगर पंचायत बड़सर पर कोर्ट की मुहर
हाईकोर्ट ने हमीरपुर जिले में नगर पंचायत बड़सर के गठन को सही ठहराते हुए ग्रामीणों की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि सरकार का यह निर्णय विकास और बेहतर प्रशासन के लिहाज से उचित है। अदालत ने संविधान के प्रावधानों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि किसी क्षेत्र को नगर निकाय घोषित करने के लिए जनसंख्या, राजस्व और आर्थिक गतिविधियों को ध्यान में रखा जाता है।

ऊना बॉटलिंग प्लांट केस में सरकार को झटका
ऊना स्थित बॉटलिंग प्लांट के लाइसेंस नवीनीकरण मामले में भी हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने माना कि पुराने कानून लागू रहेंगे और सरकार यह साबित करने में असफल रही कि नए नियम इस क्षेत्र पर लागू होते हैं। अदालत ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए बरामदगी की कहानी को संदिग्ध और अविश्वसनीय बताया।
कोर्ट ने बॉटलर्स को 15 दिनों के भीतर लाइसेंस नवीनीकरण के लिए आवेदन करने की अनुमति दी और संबंधित अधिकारी को सकारात्मक निर्णय लेने के निर्देश दिए।

सर्पदंश के कारण छूटे 8 दिन होंगे माफ
हाईकोर्ट ने एक दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि अनहोनी घटनाओं के कारण कार्य दिवस पूरे न होने पर कर्मचारी को लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। बहादुर सिंह मामले में अदालत ने विभाग को निर्देश दिया कि 8 कार्य दिवसों की कमी को माफ कर नियमितीकरण का लाभ दिया जाए।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की नीतियों का लाभ देना विभाग की जिम्मेदारी है, न कि कर्मचारी का दायित्व कि वह अपने अधिकारों के लिए भटकता रहे।

📌 इन्फो बॉक्स
- दुष्कर्म केस: आरोपी की जमानत रद्द करने से इनकार
- बड़सर केस: नगर पंचायत गठन को मिली मंजूरी
- ऊना प्लांट: सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज
- सर्पदंश केस: 8 कार्य दिवस माफ, नियमितीकरण के आदेश
- कोर्ट का संदेश: ठोस सबूत के बिना सख्त कार्रवाई नहीं



Author: Polkhol News Himachal







