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एंट्री टैक्स बैरियरों पर फास्टैग लागू न होने से बढ़ी अव्यवस्था, टैक्सी चालकों से ओवरचार्जिंग के आरोप

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🚗 एंट्री टैक्स बैरियरों पर फास्टैग लागू न होने से बढ़ी अव्यवस्था, टैक्सी चालकों से ओवरचार्जिंग के आरोप

🚨 पोल खोल न्यूज़ | शिमला

हिमाचल प्रदेश में एंट्री टैक्स बैरियरों पर फास्टैग सुविधा लागू न होने के कारण अव्यवस्था का फायदा उठाकर अवैध वसूली की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। विशेष रूप से हिमाचल नंबर की 12+1 सीटर टैक्सी गाड़ियों से निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूले जाने के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

नियमों के अनुसार, इन वाहनों के लिए एंट्री टैक्स 100 रुपये निर्धारित है। लेकिन कई बैरियरों पर कंप्यूटराइज्ड पर्ची के नाम पर चालकों से 200 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि आबकारी नियमों में 12+1 सीटर टैक्सी के लिए 200 रुपये शुल्क का कोई प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद दोगुना शुल्क लिया जा रहा है।

सरकार द्वारा पारदर्शिता बढ़ाने और नकद लेनदेन समाप्त करने के उद्देश्य से फास्टैग प्रणाली लागू करने की घोषणा की गई थी, ताकि ओवरचार्जिंग पर रोक लगाई जा सके। हालांकि, प्रदेश के अधिकांश एंट्री टैक्स बैरियरों पर अब तक यह व्यवस्था लागू नहीं हो पाई है।

स्थिति का फायदा उठाते हुए ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं। कई जगहों पर जारी पर्चियों में शुल्क का स्पष्ट उल्लेख तक नहीं किया जा रहा, जिससे वाहन चालकों को वास्तविक दर की जानकारी नहीं मिल पाती। चालक विरोध भी करते हैं, लेकिन समय की कमी और विवाद से बचने के लिए मजबूरी में अधिक भुगतान करना पड़ता है।

इस अव्यवस्था के कारण न केवल टैक्सी चालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है, बल्कि सरकार की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।


📌 इन्फो बॉक्स

  • 🚖 वाहन प्रकार: 12+1 सीटर टैक्सी
  • 💰 निर्धारित शुल्क: 100 रुपये
  • वसूली जा रही राशि: 200 रुपये तक
  • ⚠️ समस्या: ओवरचार्जिंग और पारदर्शिता की कमी
  • 📄 पर्चियों में कमी: शुल्क का स्पष्ट उल्लेख नहीं
  • 🔧 सरकारी योजना: फास्टैग लागू कर नकद लेनदेन खत्म करना
  • 🚫 वर्तमान स्थिति: अधिकांश बैरियरों पर फास्टैग लागू नहीं
  • 📉 प्रभाव: चालकों पर आर्थिक बोझ, सरकार की छवि प्रभावित

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