
एचआरटीसी पर गहराया संकट: हाईकोर्ट सख्त, मुफ्त यात्रा पर लग सकती है रोक
पोल खोल न्यूज़ । शिमला

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) की बिगड़ती वित्तीय स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि निगम को बचाने के लिए राज्य सरकार को मुफ्त और रियायती सुविधाओं पर लगाम लगानी होगी।
कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि 28 श्रेणियों की पूरी सूची पेश की जाए, जिन्हें मुफ्त या रियायती यात्रा दी जा रही है, ताकि इनमें कटौती पर विचार किया जा सके। इसके साथ ही अदालत ने यह भी जांचने को कहा कि निजी बस ऑपरेटर कम लागत में बेहतर सेवाएं कैसे दे रहे हैं और उनकी निगरानी कितनी प्रभावी है।
हाईकोर्ट ने लंबी दूरी के रूटों को लाभकारी बनाने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा और सवाल किया कि जब निजी ऑपरेटर मुनाफे में हैं, तो निगम क्यों नहीं। मामले की अगली सुनवाई 19 मई को होगी, जिसमें 27 अन्य संबंधित याचिकाओं पर भी एक साथ सुनवाई की जाएगी।
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अदालत में पेश आंकड़ों के अनुसार, HRTC की मासिक आय करीब 70 करोड़ रुपये है, जबकि खर्च 145 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। कुल देनदारी 1396 करोड़ रुपये है, जिसमें 1130.24 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाया शामिल हैं। सरकार हर महीने औसतन 60 करोड़ रुपये की सहायता दे रही है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।
इसके अलावा, करीब 1,750 बस रूट ऐसे हैं जो डीजल और रखरखाव का खर्च तक नहीं निकाल पा रहे, जिससे निगम पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
📊 इन्फो बॉक्स:
🔹 मासिक आय: ₹70 करोड़
🔹 मासिक खर्च: ₹145 करोड़
🔹 कुल कर्ज: ₹1396 करोड़
🔹 कर्मचारी/पेंशन बकाया: ₹1130.24 करोड़
🔹 सरकारी मदद: ₹60 करोड़/माह
🔹 घाटे वाले रूट: ~1,750
🔹 मुफ्त/रियायती श्रेणियां: 28
Author: Polkhol News Himachal








