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दिशाहीन बजट से थमेगा विकास, जनता को नहीं मिली राहत: प्रो. प्रेम कुमार धूमल

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दिशाहीन बजट से थमेगा विकास, जनता को नहीं मिली राहत: प्रो. प्रेम कुमार धूमल

रजनीश शर्मा। हमीरपुर

हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा पेश किए गए बजट 2026 पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे प्रदेश की प्रगति को रोकने वाला और दूरदृष्टि से विहीन बजट करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह बजट न तो विकास की स्पष्ट दिशा देता है और न ही आम जनता को कोई ठोस राहत प्रदान करता है।

🔹 बजट में कटौती से विकास कार्यों पर असर
प्रो. धूमल ने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में करीब ₹3,586 करोड़ की कमी चिंताजनक है। इससे साफ है कि सरकार विकास कार्यों को गति देने के बजाय सीमित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस कटौती का सीधा असर सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई और ग्रामीण विकास जैसी बुनियादी योजनाओं पर पड़ेगा।

🔹 कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में नई पहल का अभाव
उन्होंने कहा कि बजट में कृषि, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए कोई ठोस नई योजना नहीं लाई गई है। अधिकतर प्रावधान केंद्र प्रायोजित योजनाओं पर आधारित हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रदेश का विकास अब भी केंद्र सरकार के सहयोग पर निर्भर है।

🔹 गारंटियों पर सरकार घिरी
पूर्व मुख्यमंत्री ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 2022 में दी गई गारंटियां अब तक अधूरी हैं। एक लाख सरकारी नौकरियों का वादा पूरा नहीं हुआ, जबकि 5 लाख रोजगार सृजन का दावा केवल घोषणाओं तक सीमित है। 28 लाख महिलाओं को ₹1500 प्रतिमाह देने की योजना भी 40 महीने बाद धरातल पर नहीं उतर पाई है।

🔹 किसानों के साथ अन्याय का आरोप
प्रो. धूमल ने कहा कि किसानों से जुड़े वादों में भी कटौती देखने को मिल रही है। ₹100 प्रति लीटर दूध खरीद के वादे के बजाय ₹60 तक सीमित करने की बात सामने आना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह है।

🔹 कानून व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल
उन्होंने कहा कि बजट में कानून व्यवस्था सुधार, अस्पतालों में दवाइयों की उपलब्धता और बंद संस्थानों को दोबारा खोलने के लिए कोई ठोस वित्तीय प्रावधान नहीं किया गया है। इसके उलट, और संस्थान बंद करने के संकेत चिंता बढ़ाने वाले हैं।

📌 सार
प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों का संतुलन बनाने का प्रयास है, जिसमें विकास की स्पष्ट सोच और जनता को राहत देने की कोई ठोस नीति नजर नहीं आती।

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