

डंके की चोट पर : एक करोड़ लीटर पानी रोज पंप… फिर भी गांव प्यासे, बमसन मेवा पेयजल उठाऊ योजना में कई छेद, डिस्ट्रीब्यूशन पर उठे बड़े सवाल
रजनीश शर्मा | हमीरपुर

हिमाचल प्रदेश की पहली कंप्यूटरीकृत पेयजल उठाऊ योजना बमसन मेवा अब खुद ही अव्यवस्था का शिकार होती नजर आ रही है। योजना की मुख्य पाइप लाइन कई स्थानों पर लीक हो चुकी है, लेकिन संबंधित कंपनी और विभाग की ओर से इसे ठीक करने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं दिख रहे।
स्थानीय लोगों के अनुसार बाकर खड्ड में अवैध खनन के दौरान जेसीबी और पोकलैंड मशीनों ने कई जगह मुख्य पाइप लाइन को नुकसान पहुंचाया है, जिससे भारी मात्रा में पानी बहकर खड्डों में जा रहा है।
पाइपलाइन जगह-जगह लीक, खड्डों में बह रहा पानी
सुजानपुर-जंगलवेरी रोड के पास जाखू पंपिंग सिस्टम से उठाया गया पानी जब समीरपुर के पास मतलाना तक पहुंचता है तो कई स्थानों पर पाइप लाइन से फव्वारों की तरह पानी निकलता दिखाई देता है।
मतलाना से संगरोह के बीच भी मुख्य पाइप लाइन में कई जगह प्रेशर के कारण पानी के फुहारे बन रहे हैं। इस तरह हजारों लीटर पानी रोजाना बर्बाद हो रहा है, जो आने वाले समय में बड़े जल संकट का कारण बन सकता है।
टैंक लबालब, फिर भी गांवों में पानी की किल्लत
चौंकाने वाली बात यह है कि मतलाना और संगरोह के टैंक पूरी तरह भरे हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद संगरोह से झनिक्कर टैंक की ओर पानी के वितरण को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
झनिक्कर और बारी क्षेत्र के लोगों को एक-एक सप्ताह बाद पानी मिल पा रहा है। पानी का प्रेशर भी बेहद कम रहता है और सप्लाई की टाइमिंग को लेकर किसी अधिकारी की कोई जवाबदेही नहीं दिखाई देती।
बारी पंप हाउस की मोटरें भी बनी समस्या
बारी सेक्शन में स्थित बारी पंप हाउस की मोटरों का सही ढंग से उपयोग नहीं होने के कारण बारी से झनिक्कर टैंक तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
इसके साथ ही संगरोह से झनिक्कर टैंक में होने वाला पानी का डिस्ट्रीब्यूशन भी संदेह के घेरे में है। स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि कुछ चुनिंदा इलाकों को रोज पानी दिया जा रहा है, जबकि अन्य गांवों को हफ्तों इंतजार करना पड़ रहा है।
12 किलोमीटर के सर्वे में चौंकाने वाले खुलासे
पोल खोल न्यूज की टीम ने करीब 12 किलोमीटर क्षेत्र का सर्वे कर जो तथ्य जुटाए हैं, वे हैरान करने वाले हैं।
मतलाना के दो पंपिंग स्टेशनों से रोजाना करीब एक करोड़ लीटर पानी लिफ्ट कर संगरोह और अवाहदेवी के टैंकों तक पहुंचाया जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि चार पंपिंग मोटर खराब होने के बावजूद पंपिंग बेहतर चल रही है, लेकिन इसके बाद भी कई गांव पानी के लिए तरस रहे हैं।
सवाल: किसके इशारे पर हो रहा पानी का खेल?
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब टैंक भरे हैं और पंपिंग भी पर्याप्त हो रही है तो आखिर कौन से अधिकारी या राजनीतिक दबाव के चलते कुछ क्षेत्रों को रोज पानी और कुछ गांवों को हफ्तों इंतजार करवाया जा रहा है।
मार्च महीने में ही अगर पेयजल वितरण को लेकर जनता परेशान है तो आने वाले गर्मियों के महीनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
यदि समय रहते उच्च अधिकारियों ने इस व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया तो जन आक्रोश जल्द ही विभाग के वातानुकूलित दफ्तरों तक पहुंच सकता है।
इन्फो बॉक्स
बमसन मेवा पेयजल योजना – मुख्य तथ्य
- रोजाना करीब 1 करोड़ लीटर पानी की पंपिंग
- मतलाना के 2 पंपिंग स्टेशन से सप्लाई
- संगरोह व अवाहदेवी टैंकों तक पानी पहुंच रहा
- 4 पंपिंग मोटर खराब होने के बावजूद पंपिंग जारी
- मुख्य पाइप लाइन कई जगह लीक
- झनिक्कर और बारी क्षेत्र में 7-7 दिन बाद पानी

Author: Polkhol News Himachal









