

डंके की चोट पर : हिमाचल में फंडिंग के अभाव में तीसरे मोर्चे की विफलता लेकिन झाड़ू पर असंतुष्टों की नजरें
कई पूर्व मंत्री व पूर्व विधायक समेत कई नेता गुप्त बैठके कर तलाश रहे अपना राजनीतिक भविष्य
रजनीश शर्मा। हमीरपुर
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर तीसरे राजनीतिक विकल्प की सुगबुगाहट तेज हो गई है। इसमें कई पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक एवं नेता शामिल है। अभी तक के इतिहास के मुताबिक हिमाचल में तीसरा मोर्चा फंडिंग के अभाव में असफल होता आया है। ऐसे में असंतुष्टों के लिए आम आदमी पार्टी का झाड़ू थामना सबसे बेहतर विकल्प रह गया है। आम आदमी पार्टी के पास फंडिंग की कमी नहीं और इसे राष्ट्रीय राजनीतिक दल का दर्जा भी प्राप्त हो चुका है। बेशक दिल्ली से आम आदमी पार्टी साफ हो गई लेकिन पंजाब में अभी भी झाड़ू सरकार चली हुई है।
हिमाचल में करीब 40 नेताओं की गुप्त बैठक में भाजपा और कांग्रेस से नाराज चल रहे कई नेताओं ने भाग लिया। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में पूर्व मंत्री डॉ. रामलाल मार्कंडेय सहित कई पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता शामिल रहे।

बताया जा रहा है कि बैठक में प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें यह सहमति बनी कि संभावित तीसरे मोर्चे के विकल्प के साथ साथ आम आदमी पार्टी पर भी भरोसा जताया जा सकता है। इस बारे मजबूत जमीनी स्तर पर नेटवर्क तैयार करने पर जोर देने का निर्णय हुआ।
किसी एक चेहरे को आगे नहीं किया जाएगा
असंतुष्टों द्वारा यह निर्णय लिया गया कि तीसरे मोर्चे को मजबूत आधार देने के लिए पहले ब्लॉक और जिला स्तर पर कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इसके बाद ही नेतृत्व को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा। बैठक में शामिल कई नेताओं का अपने-अपने क्षेत्रों में अच्छा जनाधार बताया जा रहा है।
पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक भी हुए शामिल
कुल्लू में हुई इस बैठक में करीब छह पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक सहित कुल 40 नेताओं ने भाग लिया। इनमें कई ऐसे नेता भी शामिल बताए जा रहे हैं, जिनका 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने टिकट काट दिया था या जो लंबे समय से सक्रिय राजनीति में नए विकल्प की तलाश कर रहे हैं।

हमीरपुर में होगी अगली बैठक
तीसरे राजनीतिक विकल्प को लेकर अगली बैठक हमीरपुर क्षेत्र में होने की संभावना है। आने वाले दिनों में प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह की बैठकों के जरिए समर्थन जुटाने की रणनीति बनाई जा रही है। हालांकि इस बारे में डॉ. रामलाल मार्कंडेय ने कहा कि अभी इस विषय पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
प्रदेश के मुद्दों पर भी हुई चर्चा
बैठक में नेताओं ने प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों पर भी चर्चा की। इसमें बढ़ते कर्ज को लेकर चिंता जताई गई और सुझाव दिया गया कि हिमाचल को कर्ज पर निर्भर रहने के बजाय अपने प्राकृतिक संसाधनों, वन संपदा और पर्यटन के माध्यम से राजस्व बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
कुल मिलाकर नए क्षेत्रीय राजनीतिक दल एवं फंडिंग के पचड़े में न पड़ तीसरे विकल्प के रूप में पहले से ही मजबूत मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त आम आदमी पार्टी बेहतर विकल्प माना जा रहा है। अब तीसरा विकल्प भाजपा और कांग्रेस को कितना नुकसान पहुंचा पाएगा , यह उन नेताओं पर निर्भर करेगा जो अपना राजनीतिक भविष्य सुरक्षित करने के लिए भाजपा और कांग्रेस से छिटककर बाहर निकलेंगे। फिलहाल कुल्लू, हमीरपुर और कांगड़ा जिलों में असंतुष्टों की गुप्त मंत्रणाएं शुरू भी हो चुकी है।
Author: Polkhol News Himachal










