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डंके की चोट पर : हिमाचल  में फिर गरमाया राज्यसभा चुनाव का रण, आशीष , सुधीर, लखनपाल, राणा बनेंगे गेम चेंजर !!

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डंके की चोट पर : हिमाचल  में फिर गरमाया राज्यसभा चुनाव का रण, आशीष , सुधीर, लखनपाल, राणा बनेंगे गेम चेंजर !!

रजनीश शर्मा। हमीरपुर 

हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर राज्यसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। दो साल पहले हुए चुनाव की यादें अभी ताजा हैं, जब बहुमत होने के बावजूद कांग्रेस को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा था। उस चुनाव ने प्रदेश की सियासत को हिला कर रख दिया था और भाजपा ने चौंकाते हुए जीत दर्ज की थी।

📌 2024 का चुनाव क्यों बना था चर्चा का विषय?

साल 2024 में कांग्रेस के पास 40 विधायक होने के बावजूद पार्टी के उम्मीदवार मनु सिंघवी को हार झेलनी पड़ी थी। भाजपा ने संख्या कम होने के बाद भी रणनीतिक चाल चली और अपने प्रत्याशी हर्ष महाजन को विजयी बना लिया। क्रॉस वोटिंग और निर्दलीयों के समर्थन ने पूरा गणित बदल दिया था।

⚖️ अब फिर परीक्षा की घड़ी

राज्यसभा की आगामी सीट को लेकर कांग्रेस सतर्क नजर आ रही है। पार्टी हाईकमान इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। सूत्रों के अनुसार प्रत्याशी चयन में व्यापक चर्चा और गहन रणनीति बनाई जाएगी ताकि पिछली गलतियां दोहराई न जाएं।

🏛 भाजपा भी तैयार

भाजपा भी इस चुनाव को हल्के में नहीं ले रही। पार्टी का मानना है कि राजनीतिक परिस्थितियां बदलती रहती हैं और सही रणनीति से समीकरण फिर बदले जा सकते हैं।

🔍 नजरें हाईकमान पर

दोनों दलों की निगाहें अब पार्टी नेतृत्व के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं। प्रदेश की राजनीति में यह चुनाव केवल एक सीट का नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा और साख की लड़ाई माना जा रहा है।

👉 कुल मिलाकर, हिमाचल की सियासत में राज्यसभा चुनाव फिर से एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा बनता दिख रहा है, जहां हर कदम सोच-समझकर उठाया जाएगा।

🔥 राज्यसभा चुनाव: तब और अब की सियासी बिसात

हिमाचल की राजनीति में राज्यसभा चुनाव एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। दो साल पहले हुए चुनाव की गूंज आज भी सुनाई दे रही है। तब भी संख्या बल कांग्रेस के पक्ष में था और आज भी 40 विधायकों के साथ कांग्रेस मजबूत दिखाई दे रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि भाजपा का आंकड़ा 25 से बढ़कर 28 हो चुका है, जिससे सियासी समीकरण और दिलचस्प हो गए हैं।


📌 तब की तस्वीर: बहुमत के बावजूद झटका

2024 के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत था, लेकिन क्रॉस वोटिंग ने पूरा खेल बदल दिया। भाजपा ने रणनीतिक बढ़त बनाते हुए जीत दर्ज की थी। उस चुनाव ने कांग्रेस की अंदरूनी एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए थे।


📌 अब की स्थिति: सतर्क कांग्रेस, आक्रामक भाजपा

वर्तमान में कांग्रेस के पास फिर 40 विधायक हैं, जबकि भाजपा 28 पर पहुंच चुकी है। संख्या का गणित कांग्रेस के पक्ष में जरूर है, लेकिन पिछली घटना से सबक लेते हुए इस बार पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।


🚨 कड़ा पहरा: तीन विधायकों पर खास नजर

उस वक्त कांग्रेस से बगावत कर धर्मशाला के सुधीर और बड़सर से इंद्र दत्त लखनपाल ने भाजपा के समर्थन में क्रॉस वोटिंग की । फिर विधानसभा  उपचुनाव हुए  तो सुधीर और इंद्र दत्त लखनपाल  भाजपा टिकट से भी फिर एम एल ए बन विधानसभा पहुंच गए। आशीष शर्मा भी निर्दलीय विधायक से इस्तीफा दे  उपचुनाव में उतरे और फिर सीएम के गृह जिला मुख्यालय की सीट पर भाजपा टिकट पर विजय हासिल की।  विधानसभा  उपचुनाव में इन  तीनों विधायकों को हराने के लिए कांग्रेस ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था लेकिन  ये तीनों फिर भी जीत गए। आशीष शर्मा की कहानी भी  संघर्षपूर्ण है। वहीं राजेंद्र राणा सुजानपुर विधानसभा उपचुनाव एक वोट पीएम और एक सीएम के नारे के चलते हार गए। सुजानपुर में भाजपा का ही भीतरघात राणा पर भारी पड़ा।  अब जख्मी शेर ज्यादा खतरनाक सिद्ध हो सकते हैं।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार कांग्रेस ने सुधीर, आशीष और इंद्रदत्त लखनपाल पर विशेष नजर रखी है। पार्टी नेतृत्व इन तीनों विधायकों के संपर्क और गतिविधियों पर करीबी निगरानी बनाए हुए है, ताकि किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग की संभावना को रोका जा सके। वहीं पिछले राज्यसभा चुनाव में भाजपा के रणनीतिकार रहे राजेंद्र राणा पर भी कांग्रेस का कड़ा पहरा रह सकता है। राजेंद्र राणा अभी तक गेम चेंजर के रूप में अग्रणीय भूमिका में है।


🎯 प्रतिष्ठा की लड़ाई

यह चुनाव सिर्फ एक सीट का नहीं, बल्कि सियासी प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है। कांग्रेस जहां पिछली हार का दाग मिटाना चाहती है, वहीं भाजपा संख्या बढ़ने के आत्मविश्वास के साथ फिर से चौंकाने की रणनीति में है।


🗂️ इन्फो बॉक्स: राज्यसभा चुनाव – तब और अब

बिंदु 2024 चुनाव वर्तमान स्थिति
कांग्रेस विधायक 40 40
भाजपा विधायक 25 28
परिणाम भाजपा की जीत चुनाव शेष
खास मुद्दा क्रॉस वोटिंग कड़ा पहरा, अनुशासन
सियासी माहौल अप्रत्याशित सतर्क और रणनीतिक

👉 कुल मिलाकर, राज्यसभा चुनाव एक बार फिर हिमाचल की सियासत की अग्निपरीक्षा बनता जा रहा है, जहां हर वोट की कीमत और हर कदम की अहमियत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।


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