

राष्ट्र स्तरीय होली उत्सव सुजानपुर-2026: भव्यता, परंपरा और पारदर्शिता का संगम
समीक्षा बैठक में भव्य आयोजन के निर्देश
रजनीश शर्मा। हमीरपुर

बैठक में जिला और उपमंडल स्तर के अधिकारियों के साथ उत्सव की रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा की गई। विधायकों ने कहा कि सुजानपुर की ऐतिहासिक पहचान के अनुरूप आयोजन में किसी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए।
ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का प्रतीक
सुजानपुर टीहरा का होली उत्सव हिमाचल ही नहीं, बल्कि देशभर में अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए जाना जाता है। यह केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि परंपराओं, आस्था और लोकसंस्कृति का जीवंत उत्सव है।
विधायक सुरेश कुमार ने कहा कि आयोजन समिति और विभिन्न उपसमितियों का गठन किया जा चुका है, जिनमें गैर-सरकारी सदस्यों को भी शामिल किया गया है। सभी अध्यक्ष और सदस्य अपनी जिम्मेदारियों को समयबद्ध तरीके से पूरा करें।
सांस्कृतिक संध्याएं और खेलकूद हों आकर्षण का केंद्र
कैप्टन रणजीत सिंह ने कहा कि चारों सांस्कृतिक संध्याओं में श्रेष्ठ कलाकारों का चयन किया जाएगा। इसके अलावा खेलकूद प्रतियोगिताएं, महिलाओं का सामूहिक लोकनृत्य “झमाकड़ा”, रस्साकशी और अन्य पारंपरिक गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।
उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
व्यवस्थाओं पर विशेष जोर
बैठक में निम्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई:
- उद्घाटन एवं समापन पर भव्य शोभा यात्रा
- निमंत्रण कार्ड एवं स्मारिका प्रकाशन
- प्रदर्शनी स्टॉल्स
- परिवहन, पार्किंग और यातायात प्रबंधन
- कानून व्यवस्था
- सफाई और शौचालय व्यवस्था
उपायुक्त गंधर्वा राठौड़, एसपी बलवीर सिंह, एडीसी अभिषेक गर्ग और अन्य अधिकारियों ने तैयारियों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया।
सुजानपुर होली मेले का ऐतिहासिक महत्व
राजा संसार चंद और होली उत्सव की परंपरा
राजा संसार चंद ने 18वीं शताब्दी में सुजानपुर को अपनी राजधानी बनाया और यहां होली उत्सव की परंपरा की शुरुआत की। कांगड़ा कला और संस्कृति के संरक्षण में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
उनके शासनकाल में यह उत्सव राजसी वैभव, धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ मनाया जाता था, जो आज भी परंपरा के रूप में जारी है।
मुरली मनोहर मंदिर: आस्था का केंद्र
मुरली मनोहर मंदिर इस उत्सव का प्रमुख धार्मिक केंद्र है। कहा जाता है कि यहां भगवान श्रीकृष्ण की आराधना के साथ होली उत्सव की शुरुआत होती है। मंदिर की भित्ति चित्रकला और पहाड़ी शैली की वास्तुकला इसे विशेष बनाती है।
परंपरा और आधुनिकता का संगम
आज सुजानपुर का होली मेला परंपरागत धार्मिक अनुष्ठानों के साथ आधुनिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संगम बन चुका है। स्थानीय कलाकारों, महिलाओं, युवाओं और खेल प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना इस उत्सव की खास पहचान है।
इन्फो बॉक्स
राष्ट्र स्तरीय होली उत्सव सुजानपुर-2026
स्थान: सुजानपुर टीहरा, जिला हमीरपुर
स्थापना: 18वीं शताब्दी (राजा संसार चंद द्वारा)
प्रमुख आकर्षण: सांस्कृतिक संध्याएं, झमाकड़ा नृत्य, शोभायात्रा
धार्मिक केंद्र: मुरली मनोहर मंदिर
विशेष फोकस: महिलाओं और स्थानीय प्रतिभाओं की भागीदारी
निर्देश: सभी टेंडर और व्यवस्थाएं पूर्ण पारदर्शिता से
निष्कर्ष
राष्ट्र स्तरीय होली उत्सव सुजानपुर-2026 केवल एक पर्व नहीं, बल्कि हिमाचल की सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के स्पष्ट निर्देशों से यह संकेत मिल रहा है कि इस वर्ष का आयोजन भव्यता, पारदर्शिता और जनसहभागिता का आदर्श उदाहरण बनेगा।

Author: Polkhol News Himachal









