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आरडीजी बहाली पर सियासत तेज: सीएम सुक्खू ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, कैबिनेट में भी होगी अहम चर्चा

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आरडीजी बहाली पर सियासत तेज: सीएम सुक्खू ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, कैबिनेट में भी होगी अहम चर्चा

पोल खोल न्यूज़ | शिमला

केंद्र सरकार से राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) की बहाली को लेकर हिमाचल प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस मुद्दे पर शुक्रवार सुबह 11 बजे राज्य सचिवालय शिमला में सर्वदलीय बैठक बुलाई है। वहीं, इससे एक दिन पहले गुरुवार को मंत्रिमंडल की बैठक में भी आरडीजी पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल को 10 फरवरी को औपचारिक पत्र भेजकर बैठक में शामिल होने का आग्रह किया है। पत्र में कहा गया है कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद 1 अप्रैल 2026 से आरडीजी बंद किए जाने के निर्णय से प्रदेश गंभीर वित्तीय संकट में आ गया है। ऐसे में राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राज्य हित में सामूहिक रणनीति बनाना जरूरी है।

प्रदेश सरकार का अनुमान है कि आरडीजी बंद होने से आगामी पांच वर्षों में हिमाचल को करीब 50 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। यह अनुदान विशेष श्रेणी राज्य के रूप में हिमाचल की वित्तीय संरचना का अहम आधार रहा है। इसके बंद होने से विकास योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों और वित्तीय संतुलन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

वहीं नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि उन्हें 13 फरवरी की सर्वदलीय बैठक का कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। पत्र मिलने के बाद ही वे प्रतिक्रिया देंगे। इस पर मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि भाजपा विधायक दल को पहले भी बैठक के लिए आमंत्रित किया गया था और चिट्ठी भेजी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष को प्रधानमंत्री से मिलकर प्रदेश के अधिकारों की मांग करनी चाहिए, न कि राज्य सरकार पर दोषारोपण करना चाहिए।

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शिमला लौटने पर मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सीमित केंद्रीय सहायता के बावजूद 70 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों के एरियर जारी कर दिए गए हैं। वर्ष 2016 से 2021 के बीच सेवानिवृत्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण के बकाया भी दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रशासनिक खर्चों में कटौती के तहत आईएफएस कैडर की संख्या 110 से घटाकर 86 कर दी गई है। अधिकारी स्तर के पद कम किए गए हैं, जबकि निचले स्तर पर पद बढ़ाए गए हैं। कुछ स्कूलों और कॉलेजों का विलय भी किया गया है।

गुरुवार को होने वाली मंत्रिमंडल बैठक में वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी विस्तृत प्रस्तुति देंगे। बैठक में गैर-जरूरी खर्चों में कटौती, वैकल्पिक संसाधन जुटाने, राजस्व बढ़ाने के उपायों और आगामी बजट की प्राथमिकताओं पर चर्चा होगी। सरकार ने कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को सुरक्षित रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है। मुख्यमंत्री ने पुरानी पेंशन योजना जारी रखने का आश्वासन भी दिया है। बजट सत्र से पहले राज्यपाल के अभिभाषण के मसौदे को भी अंतिम रूप दिया जाएगा।

इस बीच लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने शिमला ग्रामीण क्षेत्र के जाबरी में महिला मंडल भवन के लोकार्पण के दौरान कहा कि प्रदेश आर्थिक संकट से जूझ रहा है, लेकिन फिजूलखर्ची बंद कर हिमाचल को फिर से मजबूत बनाया जाएगा।


📌 इन्फो बॉक्स:

क्या है आरडीजी और क्यों अहम?
  • आरडीजी (राजस्व घाटा अनुदान): केंद्र सरकार द्वारा विशेष श्रेणी राज्यों को दिया जाने वाला अनुदान।
  • बंद होने की तिथि: 1 अप्रैल 2026 (16वें वित्त आयोग की सिफारिश के बाद)।
  • संभावित नुकसान: अगले 5 वर्षों में लगभग ₹50,000 करोड़ का अनुमान।
  • प्रभावित क्षेत्र: विकास योजनाएं, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, वित्तीय संतुलन।
  • सरकार की रणनीति: सर्वदलीय बैठक, कैबिनेट मंत्रणा, खर्चों में कटौती और वैकल्पिक संसाधन जुटाने की योजना।



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