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9.26 करोड़ की सड़क पर कच्चे पैच! झनिक्कर–केहरवीं–बढ़ार मार्ग बना मुसीबत का सबब

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🚧 9.26 करोड़ की सड़क पर कच्चे पैच! झनिक्कर–केहरवीं–बढ़ार मार्ग बना मुसीबत का सबब

रजनीश शर्मा। हमीरपुर 

Hamirpur जिला की Tauni Devi तहसील में 9.26 करोड़ रुपये की लागत से बन रही झनिक्कर–केहरवीं–बढ़ार सड़क का काम अंतिम चरण में जरूर पहुंच गया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

मार्च 2026 तक सड़क के पूरी तरह चकाचक होने का दावा किया जा रहा है, पर फिलहाल करीब 9 किलोमीटर हिस्से में दर्जनों जगह कच्चे पैच, उखड़ी सतह और धूल के गुबार ने राहगीरों और स्थानीय लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है।


❗ अधूरा काम, बढ़ता जोखिम

एफडीआर (Full Depth Reclamation) तकनीक से सड़क को आधुनिक तरीके से अपग्रेड किया जा रहा है। खुदाई और निर्माण के बाद बसों का परिचालन तो शुरू कर दिया गया है, लेकिन दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग खतरे से खाली नहीं

  • कई स्थानों पर सड़क की सतह असमतल
  • कच्चे पैच पर फिसलन और गड्ढे
  • धूल-मिट्टी से दृश्यता कम
  • स्कूटर-बाइक चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाएं

झनिक्कर डुंगी, सिकंदर, दिम्मी  बिरड़ी समेत आसपास के क्षेत्रों में हालात ज्यादा खराब बताए जा रहे हैं।


🌫️ धूल से दुकानदार और ग्रामीण परेशान

निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिए जाने से सड़क पर उड़ती धूल दुकानदारों और घरों में घुस रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिनभर धूल का गुबार बना रहता है, जिससे स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पहले भी निर्माण कार्य में अनियमितताओं की शिकायतें उठी थीं, लेकिन सुधार के नाम पर स्थिति जस की तस है।


🗣️ सड़क पर उतरने की चेतावनी

स्थानीय निवासी किशन कुमार, बलदेव, सुभाष, वीणा, सीमा और ऋषिव ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि सड़क सुरक्षित और सुगम नहीं बन पाती, तो यह जनता के साथ अन्याय है।


📌 प्रशासन और विभाग से सवाल

  • जब सड़क अंतिम चरण में है, तो 9 किलोमीटर में कच्चे पैच क्यों?
  • बसों का संचालन शुरू करने से पहले सुरक्षा मानकों की जांच हुई या नहीं?
  • धूल नियंत्रण के लिए पानी का छिड़काव नियमित क्यों नहीं?

लोगों की मांग है कि अधूरे हिस्सों को तुरंत पक्का किया जाए, नियमित छिड़काव हो और दोपहिया चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।


👉 अब देखने वाली बात यह होगी कि विभाग मार्च 2026 से पहले सड़क को वास्तव में “चकाचक” बना पाता है या फिर यह परियोजना भी कागजों में ही चमकती रहेगी।

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