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आर्थिक अनुशासन, विकास और सौहार्द का प्रतीक रहा धूमल युग, दो बार मुख्यमंत्री, पर कभी संकट में नहीं फंसा हिमाचल

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आर्थिक अनुशासन, विकास और सौहार्द का प्रतीक रहा धूमल युग, दो बार मुख्यमंत्री, पर कभी संकट में नहीं फंसा हिमाचल

रजनीश शर्मा। हमीरपुर 

हिमाचल प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रहे प्रेम कुमार धूमल का कार्यकाल प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में आर्थिक स्थिरता, विकास और संतुलित प्रशासन के लिए याद किया जाता है। धूमल पहली बार 1998 से 2003 और दूसरी बार 2007 से 2012 तक मुख्यमंत्री रहे। इन दोनों कार्यकालों के दौरान प्रदेश कभी आर्थिक संकट में नहीं फंसा।


मजदूर-किसान से पेंशनर तक, कोई भी वंचित नहीं

धूमल सरकार के समय मजदूर, किसान, बागवान, सरकारी कर्मचारी और पेंशनर—किसी को भी आर्थिक संकट के नाम पर वित्तीय सुविधाओं से वंचित नहीं किया गया। वेतन, पेंशन और कल्याणकारी योजनाओं का नियमित संचालन उनकी प्रशासनिक प्राथमिकता रहा।


सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार को मिली नई रफ्तार

धूमल के नेतृत्व में प्रदेश में सड़कों का बड़ा नेटवर्क विकसित हुआ। स्वास्थ्य संस्थानों का विस्तार हुआ, शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम जुड़े और युवाओं के लिए रोजगार के साधन बढ़े। विकास को राजनीति से ऊपर रखकर चलाना उनके शासन की पहचान बनी।


केंद्र से सहयोग, राजनीतिक मतभेद आड़े नहीं आए

भाजपा से जुड़े होने के बावजूद धूमल को केंद्र से हमेशा सहयोग मिला। इसका एक बड़ा कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ उनके मधुर और सम्मानजनक संबंध रहे। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद संघीय मर्यादा और आपसी सम्मान की मिसाल कायम रही।


जब प्रधानमंत्री स्वयं स्वागत को खड़े थे

धूमल ने अपने राजनीतिक जीवन की एक यादगार घटना साझा करते हुए बताया कि दिसंबर 2007 में दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद वे 31 दिसंबर को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलने पहुंचे।
धूमल के शब्दों में—
“यह मेरे जीवन का सबसे बड़ा आश्चर्य था जब कमरे का दरवाजा खुला और वहाँ स्वयं प्रधानमंत्री खड़े थे। उन्होंने मुझे बिठाया और कहा—‘प्रेम जी, हालांकि मेरी पार्टी हार गई, लेकिन मुझे खुशी है कि आप मुख्यमंत्री बने।’”


दो प्रोफेसर, एक आत्मीय रिश्ता

संयोग यह रहा कि मनमोहन सिंह और प्रेम कुमार धूमल दोनों ही कभी प्रोफेसर रह चुके थे और शिक्षण संस्थानों में पढ़ा चुके थे। यही साझा पृष्ठभूमि उनकी बातचीत को और आत्मीय बनाती रही।
प्रधानमंत्री कार्यालय से भले ही दो-तीन मिनट का समय मिलने की बात कही गई थी, लेकिन मुलाकात अपेक्षा से कहीं अधिक लंबी और भावनात्मक रही।


“दिल्ली में आपका दोस्त हमेशा साथ है”

बैठक के दौरान धूमल ने बताया कि उन्होंने केंद्र का समर्थन और आशीर्वाद मिलने तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने से परहेज किया था। इस पर मनमोहन सिंह ने कहा—
“प्रेम जी, अगर कभी कोई समस्या हो तो मुझे सीधे फोन करना। दिल्ली में आपका दोस्त हमेशा मदद के लिए मौजूद है।”
बैठक के बाद प्रधानमंत्री का स्वयं दरवाजे तक छोड़ने आना, उनकी सादगी और शालीनता का प्रतीक बन गया।


सादगी, सौहार्द और स्थिरता की राजनीति

धूमल ने अपने संसदीय दिनों को भी याद किया—जब मनमोहन सिंह राज्यसभा सदस्य थे और वे लोकसभा सांसद। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री को सादगी, विनम्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक बताया।
यही सौहार्द, सहयोग और आर्थिक अनुशासन धूमल के दोनों कार्यकालों की सबसे बड़ी खासियत रहा—जिसके कारण हिमाचल प्रदेश कभी आर्थिक संकट में नहीं फंसा।

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