

डंके की चोट पर : टौणी देवी–जंगलबेरी सड़क के तीखे मोड़ अब भी तंग, 25 करोड़ की डीपीआर फिर फाइलों में सिमटने का खतरा
रजनीश शर्मा। हमीरपुर
एक तरफ सैकड़ों फीट गहरी खाई, दूसरी तरफ पक्के चट्टानी पहाड़ और बीच में बेहद संकरी सड़क—यही हकीकत है टौणीदेवी–जंगलबेरी मार्ग की, जिसे जिले की सबसे दुर्गम और हादसों के लिए बदनाम सड़क माना जाता है। वर्षों से इस सड़क पर तीखे और तंग मोड़ लोगों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं, लेकिन बार-बार बनी डीपीआर के बावजूद आज तक स्थायी समाधान धरातल पर नहीं उतर सका।
बीते रविवार को कक्कड़ के पास एक बार फिर हादसा हुआ, जब एक कार खाई में गिर गई और उसमें सवार एक व्यक्ति की मौत हो गई। जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वहां पैराफिट या सुरक्षा दीवार नहीं थी। यदि सुरक्षा इंतजाम होते, तो करीब 200 मीटर गहरी खाई में गिरने से वाहन को रोका जा सकता था।
हर दो-तीन महीने में हादसा, सड़क बनी ब्लैक स्पॉट
स्थानीय लोगों के अनुसार टौणीदेवी–जंगलबेरी सड़क पर हर दो से तीन महीने में दुर्घटनाएं हो रही हैं। बीते एक दशक में यहां दर्जनों हादसे हो चुके हैं, जिससे यह मार्ग कई स्थानों पर ब्लैक स्पॉट बन चुका है। बावजूद इसके, खतरनाक मोड़ों को न तो समय पर खोला गया और न ही पर्याप्त सुरक्षा दीवारें लगाई गईं।
31 जनवरी से झोखर के पास बड़ी गाड़ियों के लिए बंद मार्ग
सड़क की खराब हालत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि झोखर के पास यह मार्ग 31 जनवरी से बड़ी गाड़ियों के लिए बंद पड़ा है। इससे आम जनता के साथ-साथ एंबुलेंस, बसों और आपूर्ति वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है, जिससे जनजीवन पर सीधा असर पड़ रहा है।
25 करोड़ की डीपीआर तैयार, मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल
लगातार हो रहे हादसों और जनदबाव के बीच लोक निर्माण विभाग ने इस सड़क के सुधार और विस्तार के लिए करीब 25 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार कर सरकार को भेज दी है। मुख्यमंत्री के निर्देशों पर इस सड़क को राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है, जिससे जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
डीपीआर में यह है प्रस्ताव
🔴टौणीदेवी से उहल तक
7.300 किलोमीटर सड़क को साढ़े पांच मीटर चौड़ा किया जाएगा।
🔴उहल से जंगलबेरी तक
21.700 किलोमीटर सड़क की चौड़ाई पौने चार मीटर प्रस्तावित है।
🔴कुल 29 किलोमीटर मार्ग कई हिस्सों में सड़क अभी केवल तीन मीटर चौड़ी है।
दर्जनों ब्लैक स्पॉट
तीखे मोड़ों को खोला जाएगा, सड़क चौड़ी होगी और पैराफिट लगाए जाएंगे।
डीपीआर बनी, पर ज़मीन पर काम कब?
यह पहली बार नहीं है जब इस सड़क के लिए डीपीआर बनी हो। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले भी कई बार योजनाएं बनीं, लेकिन वे कागजों से आगे नहीं बढ़ पाईं। अब एक बार फिर सवाल उठ रहा है कि क्या यह 25 करोड़ की डीपीआर भी फाइलों में ही दबी रह जाएगी, या वास्तव में सड़क पर काम शुरू होगा।
हजारों लोगों की जीवनरेखा
यदि यह योजना लागू होती है, तो टौणीदेवी, उहल, कक्कड़ और जंगलबेरी क्षेत्र की 15 से 20 पंचायतों के हजारों लोगों को राहत मिलेगी। यह मार्ग न केवल जिला मुख्यालय से संपर्क का प्रमुख रास्ता है, बल्कि लंबे समय से स्थानीय लोग इसके सुरक्षित चौड़ीकरण और मोड़ सुधार की मांग कर रहे हैं।
जनहित का सीधा सवाल
टौणीदेवी–जंगलबेरी सड़क पर अब बहाने नहीं, तत्काल कार्रवाई चाहिए। सवाल साफ है—
👉 कितनी और जानें जाएंगी, तब जाकर तीखे मोड़ खोले जाएंगे और यह सड़क सुरक्षित बनेगी?

Author: Polkhol News Himachal










