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यूं ही संभव नहीं कर्तव्य पथ पर रिपब्लिक डे परेड में भाग लेना, कठिन परिश्रम और अनुशासन से मिला मौका : अनुराधा चौहान

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यूं ही संभव नहीं कर्तव्य पथ पर रिपब्लिक डे परेड में भाग लेना, कठिन परिश्रम और अनुशासन से मिला मौका : अनुराधा चौहान

रजनीश शर्मा। हमीरपुर


नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड में कदमताल करना हर किसी के बस की बात नहीं होती। इसके पीछे महीनों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और मानसिक दृढ़ता छिपी होती है। यह बात टौणी देवी क्षेत्र की एनसीसी कैडेट अनुराधा चौहान ने परेड में भाग लेने के अपने अनुभव साझा करते हुए कही।

अनुराधा ने बताया कि चयन प्रक्रिया से लेकर अंतिम परेड तक का सफर बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। रोजाना घंटों तक ड्रिल, सटीक तालमेल, शारीरिक फिटनेस और मानसिक मजबूती पर विशेष ध्यान दिया गया। कड़ाके की ठंड और लंबी रिहर्सल के बावजूद सभी कैडेट्स ने अनुशासन और समर्पण के साथ अभ्यास जारी रखा।

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उन्होंने कहा कि सुबह तड़के उठकर अभ्यास शुरू होता था और दिनभर परेड की बारीकियों पर काम किया जाता था। एक-एक कदम, हाथों की मूवमेंट और ताल—सब कुछ सटीक होना जरूरी था। प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में छोटी-छोटी गलतियों को सुधारते हुए टीम भावना को मजबूत किया गया।

अनुराधा के अनुसार, कर्तव्य पथ पर तिरंगे के सामने मार्च करना गर्व का क्षण होता है, जो सारी थकान को पलभर में भुला देता है। यह अनुभव न केवल देशसेवा की भावना को प्रबल करता है, बल्कि जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व के गुण भी विकसित करता है।

उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे एनसीसी से जुड़ें और मेहनत व लगन से अपने सपनों को साकार करें—क्योंकि कर्तव्य पथ तक पहुंचना आसान नहीं, लेकिन संभव जरूर है।

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