
सिरमौर: सार्वजनिक दृष्टि में घटना न होने पर एससी/एसटी एक्ट लागू नहीं: जिला न्यायालय
पोल खोल न्यूज़ । सिरमौर
जिला न्यायालय ने एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि यदि किसी घटना के समय केवल पीड़ित और उसके परिवार के सदस्य मौजूद हों तथा कोई स्वतंत्र गवाह न हो, तो ऐसी घटना को सार्वजनिक स्थान या सार्वजनिक दृष्टि में घटित नहीं माना जा सकता।
इसी टिप्पणी के साथ विशेष एससी/एसटी न्यायाधीश ने आरोपियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों को रद्द कर दिया। हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि अन्य आपराधिक आरोपों पर मुकदमा जारी रहेगा।
यह मामला वर्ष 2025 में सिरमौर जिले का है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुख राम व अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि आरोपियों द्वारा पिछले 15 से 20 वर्षों से उसे जाति के नाम पर जान से मारने की धमकियां दी जा रही थीं।
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सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों को सही मान भी लिया जाए, तब भी एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(1)(आर) और 3(1)(एस) के आवश्यक तत्व पूरे नहीं होते। पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट में भी किसी स्वतंत्र गवाह या सीसीटीवी साक्ष्य का उल्लेख नहीं किया गया।
उधर, विशेष न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि निजी परिसर में हुई कथित घटना को सार्वजनिक दृष्टि में घटित घटना नहीं माना जा सकता, जबकि यह शर्त एससी-एसटी एक्ट के तहत अपराध सिद्ध करने के लिए अनिवार्य है।
अदालत ने जातिसूचक अपमान से संबंधित धाराओं के तहत आरोप तय करने से इनकार करते हुए आरोपियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के आरोप रद्द कर दिए। हालांकि अदालत ने यह भी माना कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ आपराधिक धमकी का प्रथम दृष्टया मामला बनता है।
अदालत ने साफ किया कि एससी-एसटी एक्ट के आरोप भले ही रद्द कर दिए गए हों, लेकिन भारतीय न्याय संहिता के तहत अन्य आरोपों पर ट्रायल चलेगा। अदालत का यह फैसला भविष्य में समान मामलों के लिए एक अहम नजीर माना जा रहा है।
वहीं आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए मुकदमे का सामना करने की बात कही है। अब मामले में मार्च माह में अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
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📌 इंफो बॉक्स
मामला: एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम
जिला: सिरमौर
वर्ष: 2025
अदालत: जिला न्यायालय (विशेष एससी/एसटी न्यायाधीश)
मुख्य टिप्पणी:
केवल पीड़ित व उसके परिजनों की मौजूदगी में हुई घटना को सार्वजनिक दृष्टि में घटित नहीं माना जाएगा।
रद्द किए गए आरोप:
एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(आर) व 3(1)(एस)
जिन पर ट्रायल जारी रहेगा:
आईपीसी धारा 351(2) – आपराधिक धमकी
एससी/एसटी एक्ट धारा 3(वीए)
अगली सुनवाई:
मार्च में अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान

Author: Polkhol News Himachal









