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डंके की चोट पर : UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त दखल सरकार को झटका , छात्रों को राहत

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डंके की चोट पर : UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त दखल सरकार को झटका , छात्रों को राहत

रजनीश शर्मा। हमीरपुर 

देशभर में विरोध झेल रहे UGC के नए नियमों पर Supreme Court of India ने फिलहाल ब्रेक लगा दिया है। गुरुवार को शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि ये नियम अस्पष्ट हैं और इनके दुरुपयोग का गंभीर खतरा है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह इन नियमों का नया ड्राफ्ट तैयार करे


⚖️ दो हफ्ते के आंदोलन के बाद छात्रों को बड़ी राहत

UGC के “Promotion of Equity in Higher Educational Institutions Regulations, 2026” को लेकर देशभर में छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। छात्रों का आरोप था कि ये नियम बराबरी के नाम पर नई असमानता पैदा करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब छात्रों को बड़ी राहत मिली है।


👩‍⚖️ कोर्ट की टिप्पणी: नियम न सुधार हैं, न स्पष्ट

Justice Surya Kant और Justice Joymalya Bagchi की बेंच ने साफ कहा—

“UGC के नए नियमों में स्पष्टता का अभाव है और इनके गलत इस्तेमाल की पूरी आशंका है।”

कोर्ट ने सवाल उठाया कि सुधार के नाम पर ऐसे नियम क्यों बनाए जा रहे हैं जो समाज को पीछे की ओर धकेलते हैं?


📌  सुप्रीम कोर्ट में UGC के नए नियमों पर क्या बहस हुई?

🔹 तीन याचिकाएं, एक बड़ा सवाल

UGC के नए नियमों को चुनौती देते हुए मृत्युंजय तिवारी, विनीत जिंदल और राहुल दीवान ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल कीं।

🔹 याचिकाकर्ताओं की दलील

  • नए नियम अस्पष्ट हैं
  • इनके जरिए उत्पीड़न को बढ़ावा मिल सकता है
  • पहले से मौजूद नियम हर तरह के भेदभाव को कवर करते थे

📌 कोर्ट ने UGC के रेगुलेशन पर रोक क्यों लगाई?

1️⃣ सुधार के बजाय ‘रिग्रेशन’

कोर्ट ने कहा—

“SC समुदाय में भी ऐसे लोग हैं जो आर्थिक रूप से संपन्न हो चुके हैं। क्या अब हम रिवर्स दिशा में जा रहे हैं?”

यानी सुधार के नाम पर जातिवाद को और मजबूत नहीं किया जा सकता।

2️⃣ SC/ST के लिए विशेष कानून, लेकिन पुराने नियम हटाना जरूरी नहीं

जस्टिस बागची ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 15(4) SC/ST के लिए विशेष प्रावधान की अनुमति देता है,
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पहले से मौजूद व्यापक नियम खत्म कर दिए जाएं


📌  नए नियमों में ऐसा क्या बदला, जिससे विवाद खड़ा हुआ?

🔥 तीन बड़े बदलाव

1️⃣ जातिगत भेदभाव की नई परिभाषा

नए नियमों में जाति, धर्म, नस्ल, लिंग, जन्मस्थान, विकलांगता के आधार पर भेदभाव को परिभाषित किया गया —
लेकिन ड्राफ्ट में यह स्पष्ट नहीं था, जिससे भ्रम की स्थिति बनी।

2️⃣ परिभाषा में OBC को जोड़ा गया

SC/ST के साथ-साथ OBC छात्रों को भी शामिल किया गया,
जबकि पहले ड्राफ्ट में OBC का जिक्र नहीं था।

3️⃣ झूठी शिकायत पर सजा का प्रावधान हटाया गया

पहले झूठी शिकायत करने पर कार्रवाई का प्रावधान था,
जिसे नए नियमों से हटा दिया गया, जिससे दुरुपयोग की आशंका बढ़ गई।


📌  रैगिंग का मुद्दा और कोर्ट की तीखी टिप्पणी

एक वकील ने उदाहरण दिया—
यदि कोई जनरल कैटेगरी का जूनियर छात्र, SC कैटेगरी के सीनियर द्वारा रैगिंग का शिकार होता है,
तो नए नियमों में उसके पास कोई प्रभावी कानूनी उपाय नहीं बचता

यहां तक कि शिकायत करने पर उल्टा उसी पर मामला दर्ज हो सकता है।
इस पर CJI ने पूछा—

“क्या नए नियमों में रैगिंग शामिल ही नहीं है?”


📌  ये नियम लाने की जरूरत क्यों पड़ी?

🔹 पृष्ठभूमि बेहद संवेदनशील

  • 2016 में हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्र रोहित वेमुला
  • 2019 में डॉ. पायल तड़वी

जातिगत उत्पीड़न से जुड़े इन मामलों के बाद UGC को नियम सख्त करने के निर्देश मिले थे।

लेकिन कोर्ट का कहना है—
संवेदनशीलता के नाम पर असंतुलित कानून नहीं बनाए जा सकते।


📌  आगे सुप्रीम कोर्ट में क्या हो सकता है?

  • केंद्र सरकार और UGC को 19 मार्च तक जवाब देना होगा
  • नए ड्राफ्ट के लिए कानूनी और सामाजिक विशेषज्ञों की समिति बनेगी
  • राज्यों को भी पक्षकार बनाया जा सकता है
  • संसद में बहस की संभावना भी जताई जा रही है


🧾 इन्फो बॉक्स

📊 UGC नए नियम विवाद — एक नजर में

  • 🔴 नियम लागू वर्ष: 2026
  • 🔴 कोर्ट ने रोक लगाई: जनवरी 2025
  • 🔴 मुख्य आपत्ति:
    • नियम अस्पष्ट
    • दुरुपयोग की आशंका
    • जनरल कैटेगरी को पीड़ित मानने से इनकार
  • 🔴 अगली सुनवाई: 19 मार्च
  • 🔴 आदेश: नया ड्राफ्ट तैयार करें

✍️ सुप्रीम कोर्ट का संदेश बिल्कुल साफ है—

👉 बराबरी के नाम पर नया भेदभाव स्वीकार नहीं होगा।
👉 कानून संवेदनशील हो, लेकिन संतुलित भी हो।

अब गेंद सरकार और UGC के पाले में है —
या तो वे सभी छात्रों को बराबरी का भरोसा दें,
या फिर यह मामला और बड़ा संवैधानिक संघर्ष बन सकता है।

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