

डंके की चोट पर : पंचायत में भ्रष्टाचार व लाखों के गबन में प्रधान-उपप्रधान समेत 3 वार्ड पंच निलंबित
विकास के नाम पर लूट का खेल हुआ बेनकाब
रजनीश शर्मा। हमीरपुर

जिला मंडी के विकास खंड बालीचौकी की ग्राम पंचायत सुधराणी में विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये की कथित धांधलियों का मामला आखिरकार सामने आ ही गया।
सड़क, नालियां और अन्य विकास कार्य—कागजों में तो पूरे, लेकिन ज़मीनी हकीकत में घटिया निर्माण और गबन की बू साफ महसूस हुई। यह वही पंचायत है जहां विकास को नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार को प्राथमिकता दी गई।
शिकायत से जांच तक: जनता की आवाज बनी कार्रवाई की वजह
स्थानीय निवासी चुन्नी लाल ने पंचायत में हो रही अनियमितताओं को लेकर मई 2025 में विकास खंड अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपी थी।
शिकायत को रद्दी की टोकरी में फेंकने की बजाय विभाग ने जांच कमेटी गठित की—और यहीं से भ्रष्टाचार की नींव हिलनी शुरू हुई।
जांच रिपोर्ट में खुली पोल: आरोप साबित
जांच कमेटी ने जब रिकॉर्ड और कार्यों की पड़ताल की, तो कई योजनाओं में भारी अनियमितताएं सामने आईं।
बीड़ीओ कार्यालय को सौंपी गई रिपोर्ट में संबंधित पदाधिकारियों को दोषी पाया गया।
इसके बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने पर 27 जनवरी 2026 को बड़ा फैसला लिया गया।
निलंबन का फैसला: कुर्सी गई, संदेश साफ
जिला पंचायत अधिकारी द्वारा जारी आदेशों में
- पंचायत प्रधान
- उपप्रधान
- और तीन वार्ड पंचों
को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
यह कार्रवाई साफ कहती है—
पद कितना भी बड़ा क्यों न हो, गबन करने पर बख्शा नहीं जाएगा।
ईमानदार अधिकारी और बीडीओ को सलाम
इस पूरे मामले में जांच अधिकारी और बीडीओ ने जो भूमिका निभाई, वह काबिले-तारीफ है।
आज जब कई अफसर फाइलें दबाने में माहिर हो चुके हैं, वहीं इन अधिकारियों ने
- शिकायत पर संज्ञान लिया
- निष्पक्ष जांच करवाई
- और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की
ऐसे अधिकारी बताते हैं कि सिस्टम अभी पूरी तरह सड़ा नहीं है—बस उसे चलाने वाले हाथ ईमानदार होने चाहिए।
कटघरे में वो बीडीओ, जिनकी जांचें सालों से सो रही हैं
अब सवाल उन बीडीओ पर—
जो वर्षों से पंचायतों की धांधलियों की फाइलों पर नींद पूरी कर रहे हैं।
जहां शिकायतें आती हैं, लेकिन
- जांच “चल रही है”
- रिपोर्ट “तैयार हो रही है”
- और कार्रवाई “जल्द होगी”
साल बीत जाते हैं, लेकिन भ्रष्टाचार जस का तस।
यह लापरवाही नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण है।

सीमेंट घोटाला और घटिया निर्माण: विकास के नाम पर अपराध
पंचायतों में
- कम सीमेंट, ज्यादा बिल
- घटिया सामग्री
- मानकों की खुली धज्जियां
ये सब अब आम बात हो चुकी है।
ऐसे धांधलीबाज प्रधान न गांव के हितैषी हैं, न विकास के—ये सीधे-सीधे जनता के भविष्य के दुश्मन हैं।
निलंबन पर सफाई, लेकिन सवाल कायम
निलंबित उपप्रधान ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए न्यायालय जाने की बात कही है।
लेकिन सवाल साफ है—
अगर सब कुछ ठीक था, तो जांच रिपोर्ट में अनियमितताएं क्यों निकलीं?
अगर काम सही था, तो रिकॉर्ड में गड़बड़ी क्यों मिली?
अब आगे क्या?
जिला पंचायत अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि
- आगे संबंधित अधिकारियों से सभी सरकारी अभिलेख और मस्टर रोल तलब किए जाएंगे
- यदि और गड़बड़ियां मिलीं, तो सख्त कानूनी कार्रवाई तय है
इन्फो बॉक्स
मामला:
ग्राम पंचायत सुधराणी, विकास खंड बालीचौकी
शिकायतकर्ता:
चुन्नी लाल (स्थानीय निवासी)
आरोप:
विकास कार्यों में लाखों का गबन
घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग
रिकॉर्ड में अनियमितताएं
कार्रवाई:
प्रधान, उपप्रधान और 3 वार्ड पंच निलंबित
जांच रिपोर्ट के आधार पर आदेश जारी
बड़ा संदेश:
ईमानदार जांच से भ्रष्टाचार नहीं टिकता
पेंडिंग जांच = भ्रष्टाचार को शह
पंचायतें सुधारो, वरना सख्ती तय
Author: Polkhol News Himachal









