
अनारक्षित वर्गों के अधिकारों की रक्षा की मांग, राजपूत महासभा हमीरपुर ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
रजनीश शर्मा । हमीरपुर
राजपूत महासभा हिमाचल प्रदेश की हमीरपुर जिला इकाई ने केंद्र सरकार द्वारा शिक्षा संस्थानों में गठित की जा रही चयन समितियों एवं आरक्षण व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई है। इस संबंध में महासभा ने महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर सामाजिक संतुलन और समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग की है।
आरक्षण व्यवस्था से छेड़छाड़ पर आपत्ति
राजपूत महासभा ने ज्ञापन में कहा है कि 1990 में लागू मंडल आयोग की सिफारिशों के तहत ओबीसी सहित अन्य आरक्षित वर्गों को शिक्षा और रोजगार में जो अधिकार मिले थे, वे सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम थे। लेकिन वर्तमान में कुछ नीतिगत फैसलों के चलते इन अधिकारों के कमजोर होने की आशंका बढ़ रही है।
शिक्षा संस्थानों में गलत उपयोग का आरोप
महासभा का कहना है कि एससी/एसटी अत्याचार अधिनियम एवं आरक्षण नियमों का कहीं-कहीं दुरुपयोग भी हो रहा है, जिससे सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों और अभिभावकों में असंतोष पैदा हो रहा है। इससे शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हो रहा है और सामाजिक तनाव बढ़ने की स्थिति बन रही है।
सामाजिक संतुलन बनाए रखने की अपील
ज्ञापन में मांग की गई है कि चयन समितियों और शिक्षा नीतियों में संतुलन बनाए रखा जाए, ताकि किसी भी वर्ग के साथ अन्याय न हो। महासभा ने स्पष्ट किया कि वह आरक्षण के विरोध में नहीं है, बल्कि इसके निष्पक्ष और पारदर्शी क्रियान्वयन की पक्षधर है।
सरकार से हस्तक्षेप की मांग
राजपूत महासभा ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, शिक्षा मंत्री और राज्यपाल से अनुरोध किया है कि वे इस विषय में हस्तक्षेप कर ऐसे कानूनों और व्यवस्थाओं की समीक्षा करवाएं, जिससे सभी वर्गों के बीच समरसता बनी रहे और शिक्षा प्रणाली में विश्वास कायम हो।
इन्फो बॉक्स
- संगठन: राजपूत महासभा हिमाचल प्रदेश, हमीरपुर जिला इकाई
- मुद्दा: आरक्षण व्यवस्था और चयन समितियों में संतुलन
- मांग: निष्पक्ष कानून, सामाजिक न्याय और समान अवसर
- कार्रवाई: महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित
राजपूत महासभा ने अंत में आशा जताई कि सरकार इस गंभीर विषय पर सकारात्मक कदम उठाएगी, ताकि शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सौहार्द को मजबूती मिल सके।


Author: Polkhol News Himachal









