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UGC एक्ट पर बगावत: हरियाणा में BJP नेता योगेश्वर दत्त का खुला विरोध, द्रौपदी चीरहरण से जोड़कर सत्ता को घेरा

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UGC एक्ट पर बगावत: हरियाणा में BJP नेता योगेश्वर दत्त का खुला विरोध, द्रौपदी चीरहरण से जोड़कर सत्ता को घेरा

पोल खोल न्यूज। पंचकूला

हरियाणा में प्रस्तावित UGC एक्ट को लेकर विरोध की आंच अब सियासी हलकों तक पहुंच गई है। BJP नेता व ओलंपियन पहलवान योगेश्वर दत्त ने इस एक्ट के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। सोशल मीडिया पर लगातार तीन पोस्ट के जरिए उन्होंने न केवल सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए, बल्कि महाभारत के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए सत्ता के लालच पर भी तीखा हमला बोला।


UGC एक्ट के खिलाफ सवर्ण समाज में रोष

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर सवर्ण समाज में नाराज़गी लगातार बढ़ रही है। इसी कड़ी में BJP से जुड़े होने के बावजूद योगेश्वर दत्त का सामने आना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। उन्होंने दो दिनों में तीन पोस्ट कर एक्ट को समाज और खिलाड़ियों के भविष्य के लिए घातक बताया।


“बच्चों के भविष्य के लिए नहीं लड़े तो जीवन व्यर्थ”

अपनी पहली पोस्ट में योगेश्वर दत्त ने भावुक अपील करते हुए लिखा कि

“अगर आप अपने परिवार और बच्चों के भविष्य के लिए नहीं लड़ सकते, तो फिर इस जीवन का कोई अर्थ नहीं।”

उन्होंने कहा कि शिक्षा और समानता के मुद्दे पर चुप्पी साधना आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय है।


“संविधान सबको समानता का अधिकार देता है”

दूसरी पोस्ट में उन्होंने देश की संवैधानिक व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में सभी वर्गों और जातियों को समानता का अधिकार प्राप्त है।
उन्होंने चेताया कि किशोरावस्था में शिक्षा के स्तर पर असमानता थोपना देश को गलत दिशा में ले जाएगा और सामाजिक खाई को और गहरा करेगा।


द्रौपदी चीरहरण का उदाहरण देकर सत्ता पर प्रहार

तीसरी और सबसे तीखी पोस्ट में योगेश्वर दत्त ने महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए लिखा कि

“द्रौपदी चीरहरण के समय बड़े-बड़े योद्धाओं ने चुप्पी साधी। सत्ता और कुर्सी के लालच में न सत्ता बची, न कुर्सी—सबका सर्वनाश हुआ।”

उन्होंने कहा कि अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाना ही धर्म है, क्योंकि अंततः हर किसी को समय के न्याय से गुजरना पड़ता है।


सोशल मीडिया पर समर्थन और ट्रोलिंग दोनों

योगेश्वर दत्त की पोस्ट पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

  • सवर्ण समाज से जुड़े कई यूजर्स उन्हें BJP में रहते हुए भी UGC एक्ट के विरोध में खड़े होने के लिए साहसिक कदम बता रहे हैं।
  • वहीं किसान आंदोलन और पहलवान आंदोलन से जुड़े कुछ लोग उनके पुराने रुख को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं।

मीडिया से बातचीत में कही बड़ी बात

मीडिया से बातचीत में योगेश्वर दत्त ने कहा कि

“नए UGC नियमों से कॉलेज-यूनिवर्सिटी में खिलाड़ियों के बीच आपसी खाई बढ़ेगी। छोटे मामलों में एफआईआर या शिकायतें कर खिलाड़ियों का करियर खत्म किया जा सकता है।”

उन्होंने इसे शिक्षा और खेल दोनों के लिए खतरनाक बताया।


BJP के लिए बढ़ी असहजता

BJP से जुड़े एक बड़े चेहरे का सार्वजनिक तौर पर UGC एक्ट का विरोध करना पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। राजनीतिक गलियारों में इसे आने वाले समय में बड़े सियासी संकेत के रूप में देखा जा रहा है।


इन्फो बॉक्स

मामला संक्षेप में

  • मुद्दा: UGC के नए नियम
  • विरोध करने वाले: BJP नेता व ओलंपियन पहलवान योगेश्वर दत्त
  • मुख्य चिंता:
    • खिलाड़ियों का करियर प्रभावित होगा
    • शिक्षा में असमानता बढ़ेगी
    • समाज में आपसी खाई गहरी होगी
  • सोशल मीडिया असर: समर्थन के साथ ट्रोलिंग भी
  • राजनीतिक संकेत: BJP के भीतर असंतोष के संकेत

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