
तीन माह बाद बरसी बूंदें: हमीरपुर जिला में बारिश से टूटा सूखे का कहर, किसानों के चेहरे खिले
दीपा चौहान। टौणी देवी
तीन महीने के लंबे इंतज़ार के बाद शुक्रवार को हुई बारिश ने हमीरपुर जिला में राहत की सांस भर दी। बीते कई हफ्तों से प्रदेश के निचले और मध्य पर्वतीय इलाकों में सूखे जैसे हालात बन गए थे। खासकर हमीरपुर जिला के बमसन, भोरंज, सुजानपुर, नादौन और बड़सर क्षेत्रों में हुई बारिश से किसानों को बड़ी राहत मिली है।
बारिश न होने से क्या-क्या नुकसान हुआ
- खेतों की ऊपरी नमी खत्म होने से गेहूं, सरसों व सब्ज़ियों की बढ़वार प्रभावित हुई।
- बीज अंकुरण रुक गया, कई जगह दोबारा बुवाई की नौबत आई।
- पेयजल स्रोत—कुहलें, बावड़ियां और हैंडपंप—सूखने लगे।
- पशुपालकों को चारे की किल्लत झेलनी पड़ी।
- दिन में धूप तेज़ होने से मिट्टी में दरारें पड़ने लगीं, जिससे उत्पादन पर असर पड़ा।
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बारिश के तुरंत फायदे
- खेतों में नमी लौटी, फसलों को जीवन मिला।
- गेहूं, सरसों और सब्ज़ियों की बढ़वार तेज़ होने की उम्मीद।
- भूमिगत जल और प्राकृतिक जलस्रोतों में सुधार।
- किसानों की सिंचाई लागत घटी, डीज़ल/बिजली पर निर्भरता कम हुई।
- बागवानी क्षेत्रों में मिट्टी का तापमान संतुलित हुआ, जिससे जड़ों को फायदा।
ठंड बढ़ी, पहाड़ों में बर्फबारी की उम्मीद
बारिश के साथ ही ठंड में इज़ाफा दर्ज किया गया है। ऊंचे इलाकों में बर्फबारी की संभावना से गर्मियों में पानी की दिक्कत कम होने की उम्मीद जगी है। बर्फ पिघलने से नदियों-नालों और जलाशयों में जलस्तर सुधरेगा, जिसका सीधा लाभ मैदानी और निचले पर्वतीय इलाकों को मिलेगा।
कुल मिलाकर, तीन माह बाद बरसी ये बूंदें सिर्फ़ मौसम की करवट नहीं, बल्कि खेत-खलिहान और गांवों की आर्थिक संजीवनी साबित हो रही हैं। किसान अब बेहतर पैदावार की आस में आगे की खेती की तैयारी में जुट गए हैं।
Author: Polkhol News Himachal










