

प्राकृतिक खेती में है बड़ी कमाई – रिटायर्ड प्रिंसिपल ने कई क्विंटल उगाई हल्दी
बेटा डॉक्टर और बहू सरकारी अफसर, फिर भी नहीं छोड़ी खेती – भोरंज के सुभाष कपिला बने प्रेरणास्रोत
पोल खोल न्यूज़ डेस्क । हमीरपुर
✨ प्राकृतिक खेती से बदली तस्वीर: प्रदेश सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के प्रयास अब जमीनी स्तर पर अच्छे परिणाम देने लगे हैं। सरकार की योजनाओं के कारण किसानों का रुझान रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहा है। इससे न केवल फसल की गुणवत्ता बेहतर हो रही है, बल्कि किसानों की आमदनी में भी वृद्धि हो रही है।
भोरंज उपमंडल की ग्राम पंचायत भुक्कड़ के गांव बैरी ब्राह्मणा के निवासी और सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सुभाष कपिला तथा उनकी धर्मपत्नी उर्मिला कपिला ने प्राकृतिक खेती अपनाकर क्षेत्र के किसानों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने इस सीजन में लगभग 10 क्विंटल हल्दी की पैदावार करके यह साबित कर दिया कि प्राकृतिक खेती में सचमुच बड़ी कमाई है।
📌 सरकार दे रही है फसलों के बेहतर दाम
💰 मूल्य निर्धारण जानकारी बॉक्स
– प्राकृतिक गेहूं – 60 रुपये प्रति किलो
– प्राकृतिक मक्की – 40 रुपये प्रति किलो
– कच्ची हल्दी – 90 रुपये प्रति किलो
सरकार की इस पहल से किसान प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं और अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहे हैं।

👨🌾 एक प्रेरक किसान परिवार
76 वर्षीय सुभाष कपिला स्कूल प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हैं और उनकी पत्नी उर्मिला कपिला भी शिक्षा विभाग में टीजीटी पद से सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। उनका बेटा डेंटल सर्जन और बहू सीनियर अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं।
इसके बावजूद कपिला दंपत्ति ने खेती को नहीं छोड़ा। वे आज भी पूरी लगन के साथ अपने खेतों में काम करते हैं और पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से खेती करते हैं। वे किसी भी प्रकार के रासायनिक खाद या जहरीले कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करते।
🌱 हल्दी की खेती का लिया निर्णय
जब मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित करने और इस विधि से उगाई गई फसलों के लिए ऊंचे दाम तय करने की घोषणा की, तब सुभाष कपिला ने हल्दी की खेती शुरू करने का निर्णय लिया।
उन्होंने कृषि विभाग की एसएमएस मोनिका शर्मा और अन्य अधिकारियों से तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त किया तथा विभाग से हल्दी का बीज लेकर खेती आरंभ की।

📦 इस सीजन की उपलब्धि
🧾 उत्पादन जानकारी बॉक्स
– कुल उत्पादन – लगभग 10 क्विंटल हल्दी
– पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से खेती
– रासायनिक खाद और कीटनाशकों का नहीं हुआ प्रयोग
💬 सुभाष कपिला का अनुभव
सुभाष कपिला बताते हैं कि हल्दी की खेती बहुत लाभदायक है। इसमें ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती और यह ऐसी फसल है जिसे जंगली जानवर भी नुकसान नहीं पहुंचाते। इसके लिए किसी प्रकार के रासायनिक खाद या कीटनाशकों की आवश्यकता नहीं होती।
चूंकि प्रदेश सरकार हल्दी को 90 रुपये प्रति किलो की दर से खरीद रही है, इसलिए इसमें किसानों को अच्छा मुनाफा मिल रहा है।
🌟 अन्य किसानों के लिए मिसाल
कपिला दंपत्ति की यह सफलता कहानी क्षेत्र के अन्य किसानों और बागवानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि सही मार्गदर्शन और मेहनत के साथ प्राकृतिक खेती अपनाकर किसान बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं।
📢 निष्कर्ष
प्रदेश सरकार की प्राकृतिक खेती नीति किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। सुभाष कपिला की यह उपलब्धि दर्शाती है कि प्राकृतिक खेती से न केवल भूमि की उर्वरता बनी रहती है, बल्कि आर्थिक लाभ भी मिलता है।

Author: Polkhol News Himachal









