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टौणी देवी: वर्दी में कर्तव्य, फिर भी खूब चढ़ी  ‘लाल परी’!सरूर ऐसा कि बस में ही मार दी उल्टियां

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 टौणी देवी: वर्दी में कर्तव्य, फिर भी खूब चढ़ी  ‘लाल परी’!सरूर ऐसा कि बस में ही मार दी उल्टियां

ठाकुर बस में टल्ली होमगार्ड जवान, सवारियां बनीं बेबस गवाह


रजनीश शर्मा । हमीरपुर 

सोमवार को हमीरपुर से आवाहदेवी की ओर चलने वाली ठाकुर बस में जो हुआ, वह सिर्फ एक नशे में धुत सवारी की कहानी नहीं, बल्कि वर्दी, अनुशासन और सार्वजनिक जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल है। वर्दी पहने एक होमगार्ड जवान ‘लाल परी’ के नशे में इस कदर डूबा कि बस का सफर यात्रियों के लिए दुश्वार हो गया।


बस चली, अनुशासन उतर गया

सायं करीब 3:20 बजे हमीरपुर बस अड्डे से निकली बस में जवान शुरू में खुद को संभाले रहा। कोट से पीछे तक सब ठीक-ठाक चला, लेकिन उसके बाद शराब का असर दिखने लगा। जवान 2×2 सीट पर लुढ़क गया, काला बैग भी बस में इधर-उधर हिचकोले खाने लगा और फिर हालात पूरी तरह बिगड़ गए।


उल्टियों से भरी सीटें, नाक पर रुमाल

कुछ ही देर में जवान ने उल्टियां शुरू कर दीं। सीटें गंदी हो गईं और बदबू ऐसी कि अन्य सवारियां नाक पर रुमाल रखकर बैठने को मजबूर हो गईं। जिस बस से लोग सुरक्षित और आरामदेह यात्रा की उम्मीद करते हैं, वही बस एक व्यक्ति के कारण   यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बन गई।

यह ओरिजिनल फोटो नहीं है। AI Photo
यह ओरिजिनल फोटो नहीं है। AI Photo

कंडक्टर ने दिखाई समझदारी, टल्ली सवारी ने नहीं

स्थिति को देखते हुए कंडक्टर  ने जवान को पुलिस चौकी टौणी देवी उतारने की पेशकश की और बस वहां रुकी भी। लेकिन नशे में धुत जवान को   बारी मंदिर से आगे झनिक्कर उतरना है। नतीजतन, सवारियों को मजबूरी में उसी हालात में आगे का सफर तय करना पड़ा।


वर्दी में नशा: निजी गलती या सार्वजनिक अपराध?

यह घटना सिर्फ व्यक्तिगत लापरवाही नहीं है। सवाल यह है कि

  • जब वर्दी में व्यक्ति नशे की हालत में सार्वजनिक परिवहन में सफर करता है,
  • और उसकी वजह से दर्जनों लोग परेशान होते हैं,
    तो क्या इसे निजी मामला कहा जा सकता है?

वर्दी सिर्फ पहचान नहीं, जिम्मेदारी और अनुशासन का प्रतीक होती है। नशे में सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह का व्यवहार न सिर्फ विभाग की छवि धूमिल करता है, बल्कि समाज को भी गलत संदेश देता है।


शिकायत नहीं हुई, वरना…

यह महज़ सौभाग्य रहा कि किसी यात्री ने पुलिस या होमगार्ड कमांडेंट को लिखित शिकायत नहीं दी। वरना मामला अनुशासनात्मक कार्रवाई तक पहुंच सकता था—जहां वर्दी उतरने और नौकरी जाने का खतरा भी बनता।


जागरूकता जरूरी है, तमाशा नहीं

पोल खोल न्यूज के पास इस घटना से जुड़े सारे विजुअल मौजूद हैं। उद्देश्य किसी को बदनाम करना नहीं, बल्कि जनहित में जागरूकता फैलाना है—ताकि

  • वर्दीधारी कर्मी अपनी जिम्मेदारी समझें,
  • सार्वजनिक परिवहन में सफर करने वाले नागरिकों के अधिकार सुरक्षित रहें,
  • और भविष्य में कोई ‘लाल परी’ अनुशासन पर भारी न पड़े।

संदेश साफ है:
नशा निजी हो सकता है, लेकिन उसका असर जब सार्वजनिक हो जाए—तो वह लापरवाही नहीं, जवाबदेही का विषय बन जाता है।

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