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डर नहीं, अधिकारों की पहचान – टौणी देवी में छात्राओं व महिलाओं के लिए सुरक्षा और न्याय की अपील

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डर नहीं, अधिकारों की पहचान – टौणी देवी में छात्राओं व महिलाओं के लिए सुरक्षा और न्याय की अपील

रजनीश शर्मा | हमीरपुर

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टौणी देवी में छात्राओं एवं महिलाओं की सुरक्षा, अधिकारों तथा कानूनी जागरूकता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एस.एच.ई. पोर्टल से संबंधित कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम अधिनियम, बाल यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम, बाल सहायता हेल्पलाइन 1098 तथा पॉक्सो ई-बॉक्स विषयों पर एक व्यापक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य विद्यालय की छात्राओं, महिला शिक्षिकाओं एवं अन्य महिला कर्मचारियों को उनके अधिकारों, उपलब्ध सुरक्षा तंत्रों तथा शिकायत दर्ज करने की प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक करना रहा। इस अवसर पर विद्यालय की वरिष्ठ शिक्षिकाएँ प्रोमिला राणा एवं लीना देवी ने संसाधन व्यक्ति के रूप में सहभागिता की और सभी विषयों पर सरल, स्पष्ट एवं व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा प्रभावी कानूनों के साथ-साथ ऑनलाइन शिकायत एवं सहायता मंच उपलब्ध कराए गए हैं, जिनकी जानकारी होना प्रत्येक नागरिक, विशेषकर छात्राओं और महिलाओं के लिए अत्यंत आवश्यक है।

प्रोमिला राणा ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम अधिनियम पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह कानून कार्यस्थल पर महिलाओं को सम्मानजनक, सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण प्रदान करने के लिए बनाया गया है। उन्होंने छात्राओं को भविष्य में कार्यस्थलों पर अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने, किसी भी प्रकार की असहज या आपत्तिजनक स्थिति में चुप न रहने तथा शिकायत दर्ज करने की विधि के बारे में जानकारी दी। साथ ही आंतरिक शिकायत समिति की भूमिका, उद्देश्य और कार्यप्रणाली पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि सुरक्षित वातावरण पाना हर महिला का मौलिक और संवैधानिक अधिकार है। इसके पश्चात बाल यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम पर चर्चा करते हुए बताया गया कि यह कानून 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन शोषण, उत्पीड़न एवं किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार से बचाने के लिए बनाया गया है। छात्राओं को ‘अच्छे स्पर्श’ और ‘बुरे स्पर्श’ की पहचान कराई गई तथा यह समझाया गया कि किसी भी अनुचित व्यवहार की स्थिति में तुरंत अपने माता-पिता, शिक्षक या किसी विश्वसनीय व्यक्ति को जानकारी देना क्यों आवश्यक है। बच्चों को डर या संकोच त्यागकर सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।

लीना देवी ने बाल सहायता हेल्पलाइन 1098 के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह चौबीसों घंटे उपलब्ध एक निःशुल्क सेवा है, जिसके माध्यम से संकटग्रस्त बच्चों को तुरंत सहायता मिल सकती है। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि बाल श्रम, हिंसा, शोषण, उपेक्षा या किसी भी आपात स्थिति में 1098 पर संपर्क करना बच्चों के लिए अत्यंत सहायक और जीवनरक्षक सिद्ध हो सकता है। इसके साथ ही पॉक्सो ई-बॉक्स के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि यह एक ऑनलाइन शिकायत मंच है, जिसके माध्यम से बच्चे या उनके अभिभावक बिना किसी भय के यौन अपराध से संबंधित शिकायत दर्ज कर सकते हैं। यह प्रणाली शिकायतकर्ता की गोपनीयता बनाए रखते हुए त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करती है।

शिविर के दौरान छात्राओं ने सक्रिय रूप से प्रश्न पूछे और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम का वातावरण संवादात्मक, संवेदनशील एवं विश्वासपूर्ण रहा, जिससे छात्राओं में आत्मविश्वास, सजगता और जागरूकता का संचार हुआ। विद्यालय प्रशासन ने ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों को नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि छात्राएँ एवं महिलाएँ स्वयं को सुरक्षित, सशक्त और अधिकारों के प्रति सजग महसूस कर सकें। अंत में विद्यालय की ओर से यह संकल्प लिया गया कि विद्यालय परिसर में एक सुरक्षित, सम्मानजनक एवं सहयोगपूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास किए जाते रहेंगे तथा छात्राओं और महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

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