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डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के आगमन से हमीरपुर राजपूत महासभा में गौरव की लहर

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डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के आगमन से हमीरपुर राजपूत महासभा में गौरव की लहर

पोल खोल न्यूज़। हमीरपुर

महाराणा प्रताप के वंशज डॉ लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ जोकि राजस्थान से सर्व कल्याणकारी ट्रस्ट द्वारा आयोजित सेना दिवस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत करके वापिस चले गए लेकिन समाज के सभी वर्गों के साथ साथ विशेष रूप से अपने हाव भाव ,भावनाओं ,विचारों और ओजस्वी मगर हृदय की गहराइयों तक स्पर्श करने वाले भाषण से हमीरपुर जिला राजपूत महासभा का सीना गर्व से चौड़ा कर गए ।

महासभा के पदाधिकारियों को उन्हें मंच पर सम्मानित करने का दुर्लभ अवसर भी प्राप्त हुआ।महासभा को गर्व है जिस महाराणा प्रताप की फोटो , तलवार और घोड़े को आज सैकड़ों साल बाद भी महासभा अपना आदर्श,प्रेरणास्रोत और शिरोमणि मानती है उसके वंशज ने महाराजा संसार चंद की नगरी सुजानपुर टिहरा के ऐतिहासिक चौगान में हजारों की भीड़ में साबित कर दिया कि वाकई राणा सांगा,महाराणा प्रताप जैसे योद्धाओं की रगों के खून की रंगत अभी भी उनके वंशजों की नसों में उसी वेग से दौड़ रही है।

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राजपूत महासभा महाराणा को आदर्श मानते हुए समाज के सभी वर्गों में समानता और सामाजिक न्याय की मांग को उठाते हुए सरकारों के पास मजबूती से सरकारी तौर पर जातिविहीन समाज के निर्माण के लिए हर संभव प्रयास करेगी ताकि लोकतांत्रिक भारत में सरकारें किसी भी नागरिक के साथ जाति आधारित भेदभाव न करें ।

सभा हिमाचल सरकार और केंद्र सरकार से इस दिशा में आगे बढ़ कर 8 दशकों से चल रहे जातीय भेदभाव को दूर करने की मांग करती है क्योंकि सरकारों की यही नीति समाज में जातिगत,भेदभाव ,वैमनस्य,द्वेष बढ़ा रही है। सरकारी दस्तावेजों में जाति आधारित भेदभाव और इसे समाप्त करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी या सत्ता लोलुपता ही हमारे समाज के विकसित न होने और एकजुट न होने का सबसे बड़ा कारण है अन्यथा समाज का हर वर्ग सामाजिक तौर पर लगभग देश के हर हिस्से में सौहार्दपूर्ण तरीके से रह रहा है। जिस देश में दशकों तक सरकारें सत्ता लोलुपता के कारण योग्यता को आधार न बनाकर जाति को आधार बना रही हों । और उन्हीं जाति आधारित आरक्षण वाले समुदाय में 8 दशक के आरक्षण बाद भी इस वर्ग के लगभग 80 % परिवार देश भर में इस सुविधा से अभी भी वंचित ही रहे हैं। इस दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए इस से बड़ी शर्म की क्या बात हो सकती है?

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