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चमियाना सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की बदहाल सुविधाओं पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को लगाई फटकार

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चमियाना सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की बदहाल सुविधाओं पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को लगाई फटकार

पोल खोल न्यूज़ । शिमला 

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना तक सड़क चौड़ीकरण, बस सेवाओं की कमी और अन्य बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान इस गंभीर अनदेखी पर नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार को फटकार लगाई।

अदालत ने स्पष्ट कहा कि यदि अगली सुनवाई तक कार्यों में ठोस प्रगति नहीं हुई तो स्वास्थ्य विभाग और लोक निर्माण विभाग के सचिवों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर देरी का कारण बताना होगा। मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को निर्धारित की गई है।

कोर्ट को बताया गया कि शिमला के तीनों प्रमुख प्रवेश द्वार—तारादेवी, कुफरी और नालदेहरा—में चमियाना अस्पताल की दिशा दर्शाने वाले साइन बोर्ड और होर्डिंग्स नहीं लगे हैं। इसके अलावा आईएसबीटी से भट्ठाकुफर और संजौली मार्ग पर भी संकेतक बोर्ड न होने से मरीजों और तीमारदारों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

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भट्ठाकुफर से चमियाना तक 2.4 किलोमीटर सड़क में से करीब 900 मीटर हिस्सा अभी भी सिंगल लेन है। कोर्ट ने हैरानी जताई कि बार-बार निर्देशों के बावजूद सड़क चौड़ीकरण का कार्य शुरू नहीं हो पाया। लोक निर्माण विभाग और वन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि अगली सुनवाई तक सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रशासनिक स्वीकृति और धनराशि जारी करने की प्रक्रिया हर हाल में पूरी की जाए।

अदालत ने अस्पताल में पार्किंग की गंभीर समस्या पर भी चिंता जताई। जहां अस्पताल में करीब 1,000 वाहनों की पार्किंग की आवश्यकता है, वहीं वर्तमान में केवल 60 वाहनों की ही व्यवस्था उपलब्ध है। कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी सचिव को शपथ पत्र दाखिल कर समाधान बताने के निर्देश दिए हैं, अन्यथा व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा है।

बस सेवा और ब्लड बैंक पर भी सख्त निर्देश

मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने आईएसबीटी और आईजीएमसी से चमियाना के लिए सीधी बस सेवा शुरू करने के मामले में एचआरटीसी के प्रबंध निदेशक से जवाब तलब किया है। इसके साथ ही अस्पताल में पूर्ण रूप से कार्यरत ब्लड बैंक का निर्माण 30 जून 2026 तक पूरा करने और लाइसेंस प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार पर 50 हजार का सशर्त जुर्माना

एक अन्य मामले में नगर निगम मेयर का कार्यकाल ढाई साल से बढ़ाकर पांच वर्ष करने संबंधी याचिका पर जवाब दाखिल करने में लापरवाही बरतने पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर 50 हजार रुपये का सशर्त जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता के बावजूद सरकार ने रजिस्ट्री की आपत्तियां दूर नहीं कीं। निर्देश दिए गए हैं कि दो दिन के भीतर आपत्तियां दूर कर जवाब दाखिल किया जाए, अन्यथा जुर्माना जमा करना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी को होगी।

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