
“हिमाचल को फिर विकास की पटरी पर लाने के लिए कड़े फैसले ज़रूरी” पूर्व सीएम जयराम ठाकुर से विशेष बातचीत
प्रश्न 1: आपने कहा कि हिमाचल को कड़े व बड़े फैसले लेने होंगे। मौजूदा हालात में आप किस तरह के फैसलों की बात कर रहे हैं?
जयराम ठाकुर:
आज हिमाचल आर्थिक दबाव में है। विकास की रफ्तार थमी है और युवाओं में निराशा बढ़ी है। ऐसे में सरकार को राजनीतिक हिचक छोड़कर बड़े और कड़े फैसले लेने होंगे—चाहे वह वित्तीय अनुशासन हो, रोजगार सृजन हो या प्रशासनिक सुधार। बिना साहसिक निर्णयों के प्रदेश आगे नहीं बढ़ सकता।

प्रश्न 2: आप लगातार प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठा रहे हैं। क्या वाकई हालात इतने खराब हैं?
जयराम ठाकुर:
बिल्कुल। प्रदेश पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है, कर्मचारियों और पेंशनरों के भुगतान में देरी हो रही है। विकास कार्य लगभग ठप हैं। सरकार को पहले अपनी प्राथमिकताएं तय करनी होंगी—अनावश्यक खर्च बंद कर विकास और जनहित पर फोकस करना होगा।
प्रश्न 3: बेरोजगारी को लेकर युवाओं में गहरी चिंता है। सरकार को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
जयराम ठाकुर:
हिमाचल का युवा आज पक्की नौकरी चाहता है, सिर्फ घोषणाएं नहीं। भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता होनी चाहिए। स्वरोजगार और निजी क्षेत्र में अवसर बढ़ाने के लिए ठोस नीति चाहिए। युवा प्रदेश की ताकत हैं, उन्हें बोझ समझना गलत है।

प्रश्न 4: सरकार का आरोप है कि आप केवल आलोचना कर रहे हैं। समाधान क्या है, यह क्यों नहीं बताते?
जयराम ठाकुर:
हम सिर्फ आलोचना नहीं कर रहे, समाधान भी दे रहे हैं। हमारी सरकार के समय जनहित योजनाएं, स्वास्थ्य सुविधाएं और सड़क-बिजली-पानी पर निरंतर काम हुआ। आज जरूरत है उसी मॉडल को ईमानदारी से लागू करने की। विपक्ष का काम सवाल पूछना है, ताकि सरकार जवाबदेह रहे।

प्रश्न 5: आने वाले समय में हिमाचल की राजनीति और जनता के लिए आपका क्या संदेश है?
जयराम ठाकुर:
हिमाचल की जनता जागरूक है। मैं उनसे कहना चाहता हूं कि वे सच और झूठ में फर्क करें। प्रदेश हित सर्वोपरि होना चाहिए, न कि राजनीतिक स्वार्थ। हम मजबूती से जनता की आवाज उठाते रहेंगे और हिमाचल को फिर विकास की राह पर लाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।
निष्कर्ष:
पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर यह साफ संकेत देते है कि वे मौजूदा सरकार की नीतियों से असंतुष्ट हैं और हिमाचल के लिए निर्णायक, साहसिक फैसलों की वकालत कर रहे हैं। उनका फोकस—विकास, रोजगार और आर्थिक स्थिरता—आने वाले राजनीतिक विमर्श की दिशा तय करता दिखता है।

Author: Polkhol News Himachal









