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डंके की चोट पर : डिजिटल अरेस्ट कानून में नहीं, डर में मौजूद एक खतरनाक ठगी , साइबर ठगों का नया जाल — “आप डिजिटल अरेस्ट हैं” 

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डंके की चोट पर : डिजिटल अरेस्ट कानून में नहीं, डर में मौजूद एक खतरनाक ठगी , साइबर ठगों का नया जाल — “आप डिजिटल अरेस्ट हैं” 

रजनीश शर्मा। हमीरपुर 

शिमला में सामने आए ताजा मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि “डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई भी चीज़ भारत के कानून में मौजूद नहीं है, लेकिन साइबर ठग इसे हथियार बनाकर लोगों की ज़िंदगी भर की कमाई लूट रहे हैं।
ताज़ा खबर के अनुसार, साइबर ठगों ने एक सेवानिवृत्त अधिकारी को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 1.18 करोड़ रुपये ठग लिए।


❓ डिजिटल अरेस्ट क्या होता है?

👉 सीधा और साफ जवाब — डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है।

डिजिटल अरेस्ट एक पूरी तरह फर्जी शब्द है, जिसे साइबर अपराधी लोगों को डराने के लिए इस्तेमाल करते हैं।
इसमें ठग खुद को:

  • पुलिस अधिकारी
  • CBI / ED / नारकोटिक्स अधिकारी
  • साइबर क्राइम अफसर

बताकर वीडियो कॉल या फोन कॉल करते हैं और कहते हैं कि:

  • आपका नाम मनी लॉन्ड्रिंग में है
  • आपके आधार/बैंक खाते का गलत इस्तेमाल हुआ है
  • आप “डिजिटल निगरानी” में हैं
  • तुरंत सहयोग नहीं किया तो गिरफ्तारी होगी


⚖️ क्या सच में डिजिटल अरेस्ट हो सकते हैं?

डंके की चोट पर जवाब — ❌ नहीं, बिल्कुल नहीं

✔️ भारत में गिरफ्तारी केवल लिखित आदेश, FIR और कानूनी प्रक्रिया से होती है
✔️ कोई भी पुलिस या एजेंसी:

  • वीडियो कॉल पर अरेस्ट नहीं करती
  • पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती
  • व्हाट्सऐप पर नोटिस नहीं भेजती

👉 डिजिटल अरेस्ट केवल ठगों की बनाई डरावनी कहानी है।


📰 खबर यह है

शिमला में साइबर ठगों ने एक सेवानिवृत्त अधिकारी को वीडियो कॉल के जरिए खुद को अधिकारी बताकर डराया।
उसे कहा गया कि:

  • वह गंभीर अपराध में फंसा है
  • वह “डिजिटल सर्विलांस” में है
  • किसी से बात की तो गिरफ्तारी होगी

डर और दबाव में आकर पीड़ित ने 1.18 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए।
बाद में मामला सामने आया और साइबर थाना में केस दर्ज हुआ।


☎️ यदि ऐसी कॉल आए तो क्या करें?

याद रखें — डर ठगों का हथियार है

✅ तुरंत ये कदम उठाएं:

  • 📞 कॉल तुरंत काट दें
  • ❌ किसी भी दबाव में पैसे ट्रांसफर न करें
  • ❌ आधार, बैंक, OTP, PAN, वीडियो कॉल साझा न करें
  • 📵 दोबारा कॉल आए तो रिसीव न करें
  • 🚔 तुरंत नजदीकी पुलिस या साइबर क्राइम से संपर्क करें
  • 📲 साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें
  • 🌐 cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें


🟨 📌 इन्फो बॉक्स | जनता के लिए ज़रूरी चेतावनी

🔴 जान लें — ये सब झूठ है

  • ❌ डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानून नहीं
  • ❌ पुलिस पैसे ट्रांसफर नहीं करवाती
  • ❌ वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं होती

🟢 सच्चाई यह है

  • ✔️ गिरफ्तारी केवल कानूनी नोटिस से होती है
  • ✔️ कोई भी सरकारी एजेंसी डराकर काम नहीं करती
  • ✔️ डर दिखाया जाए तो सामने वाला ठग है

✍️ निष्कर्ष

डिजिटल अरेस्ट कानून नहीं, साइबर ठगों की सबसे बड़ी साजिश है।
डरने वाला हारता है और समझदारी दिखाने वाला बचता है।

👉 इस जानकारी को अधिक से अधिक शेयर करें, ताकि कोई और अपनी जिंदगी की कमाई न गंवाए।


 

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