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अधिकारी जिन पर गर्व  है : “पहले इंसान, फिर फ़ाइल” — जब हमीरपुर के डीसी अमरजीत सिंह ने फरियादी  को पेट भर खाना खिलाया फिर सुनी फरियाद 

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अधिकारी जिन पर गर्व  है : “पहले इंसान, फिर फ़ाइल” — जब हमीरपुर के डीसी अमरजीत सिंह ने फरियादी  को पेट भर खाना खिलाया फिर सुनी फरियाद 

रजनीश शर्मा। हमीरपुर 

करीब डेढ़ वर्ष पहले जब डीसी अमरजीत सिंह ने हमीरपुर में कार्यभार संभाला था, तब कई लोगों के मन में सवाल थे। सचिवालय में वर्षों का अनुभव रखने वाले इस अधिकारी को मुख्यमंत्री ने ज़िले की इतनी बड़ी जिम्मेदारी क्यों सौंपी? लेकिन आज वही हमीरपुर, मुख्यमंत्री के इस फैसले पर गर्व करता है।  उनका कार्यालय आम आदमी के लिए हमेशा खुला रहता है—ना किसी “चिट” की ज़रूरत, ना अपॉइंटमेंट की बाध्यता। बैठकों की व्यस्तता के बीच भी लोगों की समस्याएँ सुनना उनकी प्राथमिकता रहती है।
ऐसी ही एक दोपहर उनके कार्यालय में एक दृश्य सामने आया, जो लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
एक बूढ़ा, कमज़ोर-सा व्यक्ति कमरे में दाख़िल हुआ। चेहरे पर उम्र और संघर्ष की गहरी लकीरें थीं। उसका नाम शायद किसी फ़ाइल में दर्ज नहीं था, लेकिन DC साहब ने उसे “ठाकुर” कहकर संबोधित किया। उसकी उँगली थामे उसका नन्हा-सा पोता खड़ा था—बोलने में असमर्थ। माता-पिता इस दुनिया में नहीं थे और अब उस बच्चे की पूरी ज़िम्मेदारी उसी बूढ़े कंधे पर थी।
ठाकुर के हाथ में एक  दरख़्वास्त थी—शायद आख़िरी उम्मीद।
जब डीसी अमरजीत सिंह ने वह काग़ज़ हाथ में लिया, तो उनकी नज़र शब्दों पर नहीं, सामने खड़े भूखे और थके हुए दादा-पोते पर टिक गई। एक अनुभवी अधिकारी का नहीं, बल्कि एक संवेदनशील इंसान का दिल बोल उठा।
उन्होंने करुणा भरे स्वर में कहा—
“ठाकुर साहब, पहले खाना खाओ। काम तो हो ही जाएगा। ।”
उन्होंने तुरंत चपरासी को बुलाया और निर्देश दिया—
“इन दोनों को ले जाओ, भरपेट खाना खिलाओ। खाना खा लें, फिर वापस ले आना।”
ठाकुर को यक़ीन नहीं हुआ। हकलाते हुए बोला,
“साहब… मेरा काम…”
DC साहब ने सादगी लेकिन दृढ़ता से कहा—
“ठाकुर साहब, पहले खाना खाओ। आपका काम हो जाएगा।”
उस पल ठाकुर को लगा मानो वह किसी सरकारी दफ़्तर में नहीं, बल्कि किसी मंदिर के प्रांगण में खड़ा हो। सामने कोई अधिकारी नहीं, बल्कि ऐसा मसीहा था जिसने उसकी भूख को उसकी अर्ज़ी से पहले पढ़ लिया। उसकी आँखें भर आईं और वह नतमस्तक होकर भोजन के लिए चला गया।
घटना छोटी है लेकिन  जब एक भूखा बुज़ुर्ग अपनी दरख़्वास्त लेकर दफ़्तर पहुंचा, तो उसे नियमों की सूची नहीं मिली—

उसे मिला एक इंसान, जिसने उसकी फ़ाइल से पहले उसकी भूख पढ़ ली।

“ठाकुर साहब, पहले खाना खाओ…”
ये शब्द केवल संवेदना नहीं थे, ये उस प्रशासन की आत्मा थे—
जहाँ काम से पहले करुणा,
और अधिकार से पहले इंसान रखा जाता है।


🌸 डीसी हमीरपुर अमरजीत सिंह का छोटा लेकिन गहरा संदेश

“प्रशासन का असली धर्म यह नहीं कि वह सिर्फ़ निर्णय दे,
बल्कि यह है कि वह दर्द को समझे।
जब तक आख़िरी व्यक्ति का पेट भरा और मन हल्का नहीं,
तब तक हमारा काम अधूरा है।”


ℹ️इन्फो बॉक्स | क्यों अलग हैं डीसी अमरजीत सिंह?

🔹 पद: उपायुक्त (DC), हमीरपुर
🔹 पहचान: फ़ाइलों से पहले फ़रियादी
🔹 कार्यालय संस्कृति:
• बिना चिट–बिना अपॉइंटमेंट, आम आदमी के लिए खुले दरवाज़े
• समस्याओं को “नंबर” नहीं, “नाम” से सुनना


🔹 प्रशासनिक दर्शन:
✔ नियम + संवेदना
✔ शक्ति + सेवा
🔹 जनभावना:
“डीसी साहब” नहीं,
“हमारे अपने अधिकारी”


✨ निष्कर्ष

हमीरपुर को आज जिस प्रशासन पर गर्व है,
वह इसलिए नहीं कि वहाँ आदेश तेज़ी से निकलते हैं—
बल्कि इसलिए कि वहाँ आँखों में आँसू देखकर भी फ़ाइल नहीं सरकाई जाती,
पहले हाथ बढ़ाया जाता है।

डीसी अमरजीत सिंह ने साबित कर दिया है—
👉 सच्ची सेवा कुर्सी से नहीं, करुणा से चलती है।


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