
डंके की चोट पर : बधानी पंचायत घोटाला, जांच में देरी पर उठे अब जांच अधिकारियों पर भी गंभीर सवाल
रजनीश शर्मा । हमीरपुर

टौणी देवी विकास खंड के तहत आने वाली ग्राम पंचायत बधानी में हुए कथित घोटालों की जांच में देरी अगर कोई अधिकारी जान बूझ कर रहा है तो वह न तो सरकार का हितैषी है और न ही आम जनता का।
प्राकृतिक नियमों के तहत न्याय में देरी भी एक कठोर अन्याय माना जाता है।
हम उस अधिकारी का नाम नहीं लिखना चाहेंगे लेकिन मीडिया के नंबरों को ब्लॉक कर तथा मीडिया के कार्य पर गैर जिम्मेदाराना शब्दों का प्रयोग कर अपनी स्किन सेफ करने की कोशिशें आखिर कब तक कामयाब होंगी। वह अधिकारी अपनी इन्हीं लापरवाह कार्यप्रणाली के कारण कोर्ट में केसों का सामना भी कर रहा है। मीडिया की सच्चाई को झूठा करार देने वाले अगर ऐसे अधिकारी को राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त है तो नुकसान तो उस पॉलिटीशियन का भी हो रहा है।

हमारा मकसद केवल और केवल सच्चाई लिखना है किसी को व्यक्तिगत नुकसान पहुंचाना नहीं।
अगर बधानी पंचायत में रिकॉर्ड बता रहा है कि गड़बड़ हुई है तो जांच को लंबा खींचने का मकसद क्या है। जनाब, आपको कोर्ट में यह भी बताना पड़ सकता है कि बाकी पंचायतों पर तो आपने 15 से 20 दिनों के अंदर कार्यवाही कर दी लेकिन बधानी पंचायत के डॉक्यूमेंट्री प्रूफ आपके हाथों में होने के बावजूद तीन माह से कोई भी जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई। आप केस को पेंडिग डाल सकते हो लेकिन आपके उच्च अधिकारी ने हमेशा आपको सच्चाई से अपने पद की गरिमा के अनुसार कार्य करने के निर्देश, आदेश और सलाह बुला बुलाकर कई बार दे चुके हैं।


क्या है मामला?
टौणी देवी विकास खंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बधानी में विकास कार्यों से जुड़े कथित फर्जी बिलों, रिकॉर्ड में टेंपरिंग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन माह पूर्व जांच शुरू की गई, लेकिन हैरानी की बात यह है कि
अब तक जांच रिपोर्ट तैयार नहीं की गई है।

तीन माह से जांच, रिपोर्ट शून्य
यदि कोई अधिकारी जानबूझकर जांच में देरी कर रहा है, तो वह न तो सरकार का हितैषी है और न ही आम जनता का।
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार न्याय में देरी भी कठोर अन्याय की श्रेणी में आती है।
मीडिया से दूरी, सवालों से बचाव?
हम उस अधिकारी का नाम नहीं लिखना चाहेंगे, लेकिन

- मीडिया के नंबर ब्लॉक करना
- पत्रकारों के प्रति गैर-जिम्मेदाराना शब्दों का प्रयोग
- सच्ची खबरों को झूठा करार देना
यह सब अपनी जवाबदेही से बचने की कोशिश को दर्शाता है।
सूत्रों के अनुसार, संबंधित अधिकारी पहले से ही कोर्ट में मामलों का सामना कर रहा है।
डीसी हमीरपुर का स्पष्ट निर्देश
इन्फो बॉक्स | DC Hamirpur
जिला उपायुक्त हमीरपुर द्वारा इस मामले को
गंभीरता से लेने
समयबद्ध जांच
पूर्ण तथ्यों के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत करने
के निर्देश दिए जा चुके हैं।
इसके बावजूद जांच का लंबित रहना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

सबसे बड़ा सवाल
जब अन्य पंचायतों में
15–20 दिनों में जांच
रिपोर्ट
कार्रवाई

तो फिर बधानी पंचायत, जहाँ
रिकॉर्ड
डॉक्यूमेंट्री प्रूफ
दस्तावेज़ उपलब्ध हैं
वहाँ तीन महीने बाद भी रिपोर्ट क्यों नहीं?
राजनीतिक संरक्षण या प्रशासनिक लापरवाही?
यदि मीडिया की सच्चाई को झूठा बताने वाले अधिकारी को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है,
तो नुकसान सिर्फ जनता का ही नहीं,
उस पॉलिटीशियन की साख का भी हो रहा है।
पोल खोल न्यूज़ का स्पष्ट पक्ष
हमारा मकसद
किसी व्यक्ति को बदनाम करना नहीं
सच्चाई सामने लाना और जवाबदेही तय कराना है
यदि रिकॉर्ड गड़बड़ी की ओर इशारा कर रहे हैं, तो जांच को लंबा खींचने का मकसद क्या है?

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Author: Polkhol News Himachal











