
हिमाचल 2025 एक नज़र में : आपदाओं, सियासी उठापटक और आर्थिक तंगी की मार, फिर भी मजबूती से विकास की राह पर सुक्खू सरकार
रजनीश शर्मा। हमीरपुर

साल 2025 हिमाचल प्रदेश के लिए बहुत से मोर्चों पर एक परीक्षा की घड़ी साबित हुआ। प्राकृतिक आपदाओं ने राज्य को हिलाकर रख दिया। जहां एक तरफ मानसून की विनाशलीला ने जनजीवन और बुनियादी ढाँचे को भारी नुकसान पहुँचाया, वहीं चीफ इंजीनियर विमल नेगी की संदिग्ध मौत ने प्रशासनिक हलकों में भूचाल ला दिया। राज्य सरकार ने हिमाचल को आपदा-प्रभावित राज्य घोषित किया और प्रधानमंत्री की ओर से 1,500 करोड़ रुपये की राहत सहायता भी मिली।
लेकिन इस सबके बीच आर्थिक मोर्चे पर परेशानियाँ बनी रहीं। कर्मचारियों को वेतन और पेंशन के लिए इंतजार करना पड़ा और राज्य की वित्तीय हालत पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप चलते रहे। सियासी घटनाक्रम: साल के दौरान सियासी मोर्चे पर भी खूब हलचल रही। पंचायत चुनाव न हो पाने पर भाजपा और कांग्रेस के बीच जमकर तनातनी हुई। कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर विनय कुमार को चुना, जबकि भाजपा ने फिर से राजीव बिंदल पर भरोसा जताया।

शिमला के रिज मैदान पर वीरभद्र सिंह की प्रतिमा के अनावरण जैसे भावनात्मक आयोजनों ने भी सियासी माहौल को गर्माया। अपराध और प्रशासन: साल 2025 में अपराध के मोर्चे पर भी कई घटनाएं सुर्खियों में रहीं। चीफ इंजीनियर विमल नेगी का मामला सीबीआई जांच तक पहुँचा और पुलिस से लेकर प्रशासन में बदलाव देखने को मिले। वहीं कुछ चर्चित आपराधिक मामलों में अदालतों के फैसले और पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने भी ध्यान खींचा।
शिमला के बीसीएस स्कूल के छात्रों का अपहरण हो या आईजीएमसी में डॉक्टर द्वारा मरीज से मारपीट – ये घटनाएँ पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनीं।
कुल मिलाकर 2025 हिमाचल प्रदेश के लिए एक ऐसा साल रहा, जो आपदाओं की चुनौतियों, आर्थिक तंगी और सियासी घटनाओं के बीच संतुलन बनाते हुए गुजरा। सीमित संसाधनों के साथ राज्य सरकार ने हालात संभालने की कोशिश की लेकिन केंद्र की मदद के अभाव और वित्तीय दबावों ने चुनौतियों को बढ़ा दिया। इस पूरे साल ने प्रदेश को परखा और आने वाले वर्षों के लिए कई सवाल छोड़ दिए हैं।



Author: Polkhol News Himachal









