
HP High Court: जबरन और बिना भूमि अधिग्रहण कानून के नहीं ले सकते निजी जमीन
पोल खोल न्यूज़ | शिमला
हिमाचल हाईकोर्ट ने संपत्ति के अधिकार को महत्वपूर्ण सांविधानिक अधिकार बताते हुए कहा है कि जबरन और बिना भूमि अधिग्रहण कानून के कोई भी किसी की निजी जमीन नहीं ले सकता। वहीं, न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने एक मामले में स्पष्ट किया कि कोई भी प्रोजेक्ट प्रमोटर किसी व्यक्ति को उसकी जमीन बेचने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।
अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 300-ए का हवाला देते हुए कहा कि संपत्ति का अधिकार एक सांविधानिक अधिकार है। कोर्ट ने जबरन बिक्री पर रोक लगाते हुए कहा कि यदि किसी याचिकाकर्ता ने अभी तक अपनी जमीन बेचने के लिए सहमति नहीं दी है तो उसे जबरन बिक्री के लिए मजबूर नहीं कर सकते। यदि प्रोजेक्ट प्रमोटर को याचिकाकर्ताओं की भूमि की आवश्यकता है तो वह केवल दो ही तरीकों से ली जा सकती है। पहला, मालिक की सहमति से और दूसरा, भूमि अधिग्रहण के लिए कानूनी प्रक्रिया को अपनाकर। हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश दिया कि बिना उचित मुआवजा दिए व कानूनी प्रक्रिया पूरी किए बिना प्रोजेक्ट प्रमोटर किसी की भी जमीन का उपयोग नहीं करेगा। इसे लेकर जिला हमीरपुर के पलाही गांव के याचिकाकर्ता अजीत सिंह राणा और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
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वहीं, याचिका में आरोप लगाया था कि संबंधित प्रोजेक्ट प्रमोटर (एसजेवीएन) उनकी भूमि का उपयोग करना चाहता है, लेकिन उन्हें उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें उन दरों पर सेल डीड करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो उन्हें स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने मांग की थी कि उनकी जमीन का अधिग्रहण भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, पुनर्व्यवस्थापन और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 के तहत किया जाए। प्रतिवादी प्रोजेक्ट प्रमोटर एसजेवीएन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि कई याचिकाकर्ताओं ने पहले ही आपसी सहमति से तय दरों पर अपनी जमीन बेच दी है। याचिकाकर्ताओं ने बातचीत के बाद अपनी जमीन बेचने के लिए स्वेच्छा से सहमति दी है।


Author: Polkhol News Himachal









