
ऊटपुर ITI निर्माण में सरकारी तंत्र फेल! 10.20 करोड़ की परियोजना पर लगा ‘ब्रेक’; युवाओं का भविष्य अधर में
करोड़ों का बजट, तीन साल का वक्त… फिर भी अधूरा सपना!
संजय कुमार। ऊहल
प्रशासनिक अनदेखी और सरकारी तंत्र की सुस्ती के चलते उटपुर में निर्माणाधीन सरकारी आईटीआई (ITI) का भविष्य अंधकार में डूबता नजर आ रहा है। वर्ष 2022 में बड़े जोर-शोर से शुरू हुआ यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अब ठप पड़ा है। करीब 10 करोड़ 20 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत होने के बावजूद पिछले आठ महीनों से निर्माण कार्य पूरी तरह बंद है, जिससे ग्रामीणों में जबरदस्त रोष है।
खंडहर बनता सपना
स्थानीय लोगों के अनुसार, दो साल तक काम चला, लेकिन उसके बाद अचानक निर्माण कार्य पर ‘ब्रेक’ लग गया। आज हालात यह हैं कि अधूरा भवन खंडहर में तब्दील होने की कगार पर पहुंच चुका है। बारिश और समय के साथ निर्माण सामग्री खराब हो रही है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका भी बढ़ गई है।

पूर्व प्रधान की दरियादिली, विभाग की बेरुखी
इस परियोजना के लिए पंचायत के पूर्व प्रधान ने 18 कनाल जमीन विभाग के नाम करवाई थी, ताकि क्षेत्र के बच्चों को तकनीकी शिक्षा के लिए बाहर न जाना पड़े। उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद थी कि आईटीआई बनने से इलाके की तस्वीर बदलेगी, लेकिन ढुलमुल कार्यप्रणाली ने हमारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।”
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MLA से लेकर विभाग तक—सब मौन!
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने स्थानीय विधायक और संबंधित विभाग के कई चक्कर काटे, मगर हर बार कोरे आश्वासन ही मिले। धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही।
मुख्यमंत्री से गुहार, PWD दफ्तर के बाहर आंदोलन की तैयारी
अब स्थानीय निवासियों ने मुख्यमंत्री से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि काम तुरंत दोबारा शुरू नहीं हुआ, तो वे चक्का जाम और PWD कार्यालय के बाहर विशाल धरना-प्रदर्शन करेंगे। ग्रामीणों का साफ कहना है— “अगर मशीनें काम पर वापस नहीं लौटीं, तो आंदोलन के लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा।”
क्या है काम रुकने की वजह?
उधर, सहायक अभियंता नितेश भारद्वाज ने बताया कि ठेकेदार की पिछले एक साल से पेमेंट नहीं हुई, इसी कारण ठेकेदार ने काम बंद किया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भुगतान होते ही निर्माण कार्य पुनः शुरू कर दिया जाएगा।
सवाल वही—जवाब कब?
उटपुर की यह आईटीआई परियोजना केवल एक इमारत नहीं, बल्कि स्थानीय युवाओं के भविष्य की उम्मीद है। सवाल यह है कि 10.20 करोड़ की परियोजना पर जमी ‘जंग’ कब हटेगी और क्या जिम्मेदार महकमे समय रहते जवाबदेही तय करेंगे—या फिर यह सपना कागजों में ही सिमटकर रह जाएगा?


Author: Polkhol News Himachal









