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प्रवासी हिमाचलियों की सांस्कृतिक पहचान के संवाहक बने राजीव राणा, हिमाचली परंपराओं को जीवंत रखने का दिया सशक्त संदेश

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प्रवासी हिमाचलियों की सांस्कृतिक पहचान के संवाहक बने राजीव राणा, हिमाचली परंपराओं को जीवंत रखने का दिया सशक्त संदेश

पोल खोल न्यूज। लुधियाना

हिमाचली संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं को प्रवासी समाज के बीच जीवंत बनाए रखने में राजीव राणा की भूमिका लगातार प्रभावशाली होती जा रही है। हिमाचल प्रांतीय सभा द्वारा रजि ग्यासपुरा, लुधियाना में आयोजित सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए राजीव राणा ने प्रवासी हिमाचलियों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने का प्रेरक संदेश दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जसपुरा ब्लॉक के अध्यक्ष श्याम लाल डोगरा ने की। अपने संबोधन में राजीव राणा ने कहा कि प्रवासी जीवन की व्यस्तताओं के बीच अपनी भाषा, लोक परंपराओं, धार्मिक आस्थाओं और सांस्कृतिक मूल्यों को संजोए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हिमाचली संस्कृति केवल रीति-रिवाजों का संग्रह नहीं, बल्कि भाईचारे, परिश्रम, सादगी और सामाजिक समरसता की जीवंत मिसाल है।


राजीव राणा ने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि हिमाचल प्रांतीय सभा जैसे संगठन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का अत्यंत सराहनीय कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सहित देश के विभिन्न राज्यों में बसे हिमाचली प्रवासी समाज ने अपने संस्कारों और मेहनत से एक विशिष्ट पहचान बनाई है, जिसे सहेजना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के उपरांत आयोजित भव्य माँ के जागरण ने श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक चेतना का अनुपम दृश्य प्रस्तुत किया। जागरण के दौरान पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव की अनुभूति देखने को मिली।


इस अवसर पर डिम्पल राणा (अध्यक्ष, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा पंजाब), राजेश रत्न भारद्वाज (अध्यक्ष, हिमाचल परिवार संगठन), अशोक ठाकुर (जिला अध्यक्ष, हिमाचल प्रांतीय सभा), अनिल डोगरा (महासचिव) सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में प्रवासी हिमाचली समाज के लोग उपस्थित रहे।


अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, सहयोगियों और उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त किया।
राजीव राणा के नेतृत्व और विचारों ने यह स्पष्ट कर दिया कि हिमाचली संस्कृति को प्रवासी समाज के बीच जीवंत रखना केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक सतत सामाजिक और सांस्कृतिक आंदोलन है।

 

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