
बधानी पंचायत कथित घोटाला: जांच फिर फाइलों में उलझी, बीडीओ के आदेश के बावजूद नतीजा शून्य
रजनीश शर्मा। हमीरपुर
टौणी देवी विकास खंड की ग्राम पंचायत बधानी में सामने आए कथित घोटालों की जांच एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरोप हैं कि जांच को निष्कर्ष तक पहुंचाने के बजाय उसे कागज़ों, फाइलों और बार-बार गठित की जा रही जांच समितियों में उलझाकर रखा जा रहा है। जैसे ही मीडिया इस मामले में हो रही देरी को उजागर करता है, संबंधित विभाग नई प्रक्रिया शुरू कर देता है, लेकिन आज तक किसी भी जांच का अंतिम परिणाम सामने नहीं आ पाया है।
हाल ही में बीडीओ बमसन वैशाली शर्मा द्वारा इस मामले को लेकर स्पष्ट आदेश जारी किए गए हैं। जारी पत्र में पंचायत निरीक्षक राजेश कुमार, उप-पंचायत निरीक्षक सुशील कुमार और SEBPO रवि कुमार को निर्देश दिए गए हैं कि वे ग्राम पंचायत बधानी से संबंधित शिकायतों की जांच स्थिति का परीक्षण कर अपने तथ्यात्मक टिप्पणियां तीन दिनों के भीतर प्रस्तुत करें। यह आदेश उपायुक्त कार्यालय हमीरपुर से प्राप्त शिकायत के बाद जारी किया गया है, जिसमें शिकायतकर्ता द्वारा जांच में अनावश्यक देरी का आरोप लगाया गया है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी एक समिति का गठन कर जांच कराई जा चुकी है, लेकिन न तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक हुई और न ही किसी प्रकार की ठोस विभागीय या कानूनी कार्रवाई सामने आई। शिकायतकर्ता का कहना है कि वे भ्रष्टाचार से जुड़े पुख्ता दस्तावेज और साक्ष्य अधिकारियों के समक्ष रख चुके हैं, इसके बावजूद उनकी शिकायत पर कोई निर्णायक कदम नहीं उठाया गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या कथित घोटाले में शामिल पंचायत प्रतिनिधियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है? या फिर विभागीय स्तर पर ही आरोपियों को बचाने की कोशिशें की जा रही हैं? बार-बार जांच अधिकारियों से रिपोर्ट तलब करना, लेकिन किसी निष्कर्ष पर न पहुंचना, विभागीय कार्यप्रणाली को संदेह के घेरे में लाता है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जांच को जानबूझकर लंबित रखना प्राकृतिक न्याय और प्रशासनिक पारदर्शिता के सिद्धांतों का उल्लंघन हो सकता है। ऐसे मामलों में समयबद्ध जांच और जवाबदेही तय करना आवश्यक होता है।
अब देखना यह होगा कि बीडीओ बमसन द्वारा जारी ताजा आदेश केवल औपचारिकता बनकर रह जाते हैं या वास्तव में राजेश कुमार, सुशील कुमार और रवि कुमार की रिपोर्ट के आधार पर मामले में कोई ठोस और अंतिम निर्णय लिया जाता है। जनता और शिकायतकर्ता दोनों को इंतजार है कि क्या बधानी पंचायत कथित घोटाले की फाइलें कभी सच का चेहरा देख पाएंगी या फिर यह मामला भी जांचों के जाल में ही उलझा रहेगा।
Author: Polkhol News Himachal









