

संसद में ई-सिगरेट विवाद: आखिर क्या है E.Cigarette और क्यों मचती है हर बार इतनी बहस?
पोल खोल न्यूज। नई दिल्ली

संसद के शीतकालीन सत्र में भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर द्वारा एक सांसद पर सदन के भीतर ई-सिगरेट पीने का आरोप लगाने के बाद यह मुद्दा सुर्खियों में आ गया। हंगामे के बीच एक बार फिर देश में यह सवाल उठ खड़ा हुआ—ई-सिगरेट है क्या, यह कितनी सुरक्षित है, और नॉर्मल सिगरेट की तुलना में कितनी खतरनाक?
क्या होती है ई-सिगरेट (What is E-Cigarette?)
ई-सिगरेट एक बैटरी से चलने वाला इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है, जो एक खास तरल पदार्थ (E-Liquid) को गर्म करके भाप (Aerosol) में बदल देता है।
उपयोगकर्ता इस भाप को सांस के साथ अंदर लेता है, जिससे निकोटीन और अन्य केमिकल सीधे फेफड़ों में पहुँचते हैं।

E-Liquid में क्या होता है?
- निकोटीन (Nicotine) – कई वैरायटी ‘निकोटीन-फ्री’ लिखी होती हैं, लेकिन टेस्ट में निकोटीन मौजूद पाया गया है।
- प्रोपाइलीन ग्लाइकोल (PG)
- वेजिटेबल ग्लिसरीन (VG)
- फ्लेवरिंग एजेंट्स
- लगभग 60–70 तरह के केमिकल्स, जिनमें कुछ संभावित रूप से हानिकारक पाए गए हैं।
इस वजह से डॉक्टर इसे फेफड़ों के लिए हानिकारक और युवाओं में निकोटीन की लत बढ़ाने वाला मानते हैं।
ये भी पढ़ें : 70 दिन बाद भी कार्रवाई शून्य: बधानी पंचायत शिकायत पर BDO टौणी देवी की लापरवाही, ग्रामीणों ने उठाए गंभीर कानूनी सवाल
नॉर्मल सिगरेट से कितनी अलग है ई-सिगरेट?
तुलना |
नॉर्मल सिगरेट |
ई-सिगरेट |
|---|---|---|
| धुआं | तंबाकू जलने से धुआं | तरल को गर्म करने से भाप |
| निकोटीन | अधिक मात्रा | कम–ज्यादा, कई बार छुपा हुआ |
| कैंसर का जोखिम | अधिक | कम माना जाता है, पर सुरक्षित नहीं |
| युवा वर्ग पर प्रभाव | लत तेजी से | फ्लेवर व आसान उपलब्धता से लत तेजी से |
विशेषज्ञ मानते हैं कि ई-सिगरेट को ‘सुरक्षित विकल्प’ कहना भ्रम है। यह लत को खत्म नहीं करती, बल्कि निकोटीन की निर्भरता को बदल देती है।
दुनिया में क्यों बैन हैं ई-सिगरेट?
कई देशों ने ई-सिगरेट पर आंशिक या पूर्ण प्रतिबंध लगाया है, क्योंकि:
- यह किशोरों के बीच तेजी से लत फैलाती है
- इसमें मौजूद केमिकल्स फेफड़ों की बीमारी (EVALI) का कारण बन सकते हैं
- निकोटीन दिमाग के विकास को प्रभावित करता है
- लंबे समय का वैज्ञानिक डेटा अभी भी अधूरा है
भारत ने भी 2019 में ई-सिगरेट के उत्पादन, बिक्री और विज्ञापन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया।
इन्फो बॉक्स
E-Cigarette: एक नजर में
- बैटरी से चलने वाला इलेक्ट्रॉनिक वेपिंग डिवाइस
- भाप के ज़रिये निकोटीन व केमिकल्स फेफड़ों में पहुंचते हैं
- ‘निकोटीन-फ्री’ ई-सिगरेट में भी निकोटीन पाया गया
- 60–70 तक केमिकल्स और फ्लेवरिंग एजेंट मौजूद
- युवाओं में लत बढ़ाने की सबसे बड़ी वजह फ्लेवर
- कई देशों में बिक्री पर प्रतिबंध
- भारत में भी 2019 से बैन


Author: Polkhol News Himachal









