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*लम्बलू पंचायत में ‘फ़ैमिली पैकेज स्कीम’? फिर फंसे प्रधान जी !!

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📰 **लम्बलू पंचायत में ‘फ़ैमिली पैकेज स्कीम’? फिर फंसे प्रधान जी !!

विशेष रिपोर्ट। रजनीश शर्मा 

प्रधान साहब को फिर पहुँचा रिकवरी का प्यार भरा पत्र!**

विकास भले धीमा चले… पर नोटिसों की स्पीड तो गज़ब है!


हमीरपुर के बमसन ब्लॉक की लम्बलू पंचायत में प्रधान साहब को एक बार फिर विभाग ने याद किया है—
और इस बार भी वजह वही पुरानी:
“बेटे की फर्म का बेजोड़ योगदान!”

पंचायत कार्यों में 25 बिल बेटे की फर्म से लगाना प्रधान साहब को महंगा पड़ गया। विभाग ने इसे सीधा-सीधा कंफ्लिक्ट ऑफ इंट्रेस्ट मानते हुए एक ताज़ा रिकवरी ठोक दी है।
राशि— ₹53,058,
भाव— “कृपया इसे जमा करवा दें, वरना अगला अध्याय तैयार है।”

गांव में चर्चा यह भी है कि पंचायत में काम करते समय “स्थानीय दुकानें” कम और “घर की दुकान” ज्यादा याद आती है। दूसरी ओर, विभाग भी नोटिस भेज-भेजकर अब इतना अनुभव प्राप्त कर चुका है कि टाइपिंग की स्पीड प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकता है।


🗣️ क्या कहती हैं बीडीओ बमसन?

वैशाली शर्मा  बीडीओ बमसन, का रुख बिल्कुल साफ और तीखा:

“पंचायत प्रधान ने 25 बिल अपने बेटे की फर्म से लगाए जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। यह मामला सीधे ‘क्लैश ऑफ इंट्रेस्ट’ की श्रेणी में आता है, इसलिए ₹53,058 की रिकवरी डाली गई है। पूर्व की रिकवरी अभी लंबित है, इसलिए यह नई कार्रवाई की गई। यदि प्रधान इस राशि का भुगतान नहीं करते हैं तो हम ‘रेटर्न टू एक्ट’ मोड में जाएंगे और अगला कदम अनिवार्य होगा।”

बीडीओ का बयान सुनकर साफ है—
विभाग इस बार न तो मज़ाक में है और न ही “परिवारवाद” को पंचायत कार्यों में एंट्री देने के मूड में।


🗣️ प्रधान का पक्ष— “बेटा अलग रहता है… बिलों की सोच अलग है!”

प्रधान करतार सिंह चौहान ने पूरी कार्रवाई को
“राजनीति + षडयंत्र + गलतफहमी = रिकवरी”
का फार्मूला करार दिया है।

उनका कहना है—

  • “मेरा बेटा 25–30 साल से अलग रहता है।”
  • “उसकी फर्म का पंचायत कार्यों से कोई लेना-देना नहीं।”
  • “मेरे खिलाफ विपक्ष लगातार खेल कर रहा है।”
  • “मैंने पंचायत में केवल विकास किया है, परिवारवाद नहीं!”

लेकिन विभाग का लॉजिक सरल है—
“अलग रहते हों, पर बिल तो आपकी पंचायत में ही रहते मिले हैं।”

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📌 इन्फो बॉक्स — विवाद की पूरी कहानी एक नज़र में

🔹 मामला क्या है?

  • लम्बलू पंचायत में 25 बिल प्रधान के बेटे की फर्म से लगाए गए
  • विभाग ने इसे नियम उल्लंघन माना
  • कुल रिकवरी राशि: ₹53,058

🔹 बीडीओ का पक्ष

  • यह सीधा कंफ्लिक्ट ऑफ इंट्रेस्ट है
  • पहले वाली रिकवरी भी अभी पेंडिंग
  • नोटिस जारी किया जा चुका है
  • राशि न भरने पर अगली कार्रवाई 100% तय

🔹 प्रधान का पक्ष

  • “बेटा अलग रहता है, फर्म उसका है—पर राजनीति इससे बड़ी है!”
  • “मेरे खिलाफ विपक्ष साजिश कर रहा है”
  • “मैंने पंचायत के विकास में कोई कमी नहीं छोड़ी”

🔹 अब आगे क्या?

  • रिकवरी जमा नहीं हुई तो विभाग कानूनी मोड में
  • पंचायत में फिर से हलचल संभव
  • अगला नोटिस शायद पहले से भी तेज पहुंचे!
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