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हिमाचल में करवट बदल सकता है माैसम, बारिश-बर्फबारी के आसार

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हिमाचल में करवट बदल सकता है माैसम, बारिश-बर्फबारी के आसार

पोल खोल न्यूज़ | शिमला

हिमाचल प्रदेश में सर्दी का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। ताबो में पारा माइनस 7.0 डिग्री पहुंचा दर्ज किया गया है। राज्य में 22 स्थानों पर न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्यिसय से कम दर्ज किया गया है। माैसम विभाग के अनुसार सुबह और देर रात के समय कुछ जगहों पर तीन दिन घना कोहरा छाए रहने का येलो अलर्ट है। मंडी में घना कोहरा दर्ज किया गया।

माैसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार पूरे प्रदेश में 3 दिसंबर तक माैसम साफ रहने का पूर्वानुमान है। लेकिन 4 व 5 दिसंबर को कुछ स्थानों पर बारिश-बर्फबारी हो सकती है। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से माैसम में यह बदलाव आ सकता है। वहीं मैदानी व निचले कई इलाकों में सुबह और देर रात के समय कुछ जगहों पर 29 नवंबर से 1 दिसंबर तक घना कोहरा छाए रहने का येलो अलर्ट जारी हुआ है। ठंड बढ़ने के साथ ही उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में तापमान शून्य से नीचे पहुंच गया है।

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वहीं, चूड़धार यात्रा पर 1 दिसंबर से पूरी तरह से प्रतिबंध लग जाएगा। यह प्रतिबंध अप्रैल तक जारी रहेगा। इस अवधि के दौरान यदि कोई यात्रा पर जाता है तो उसके खिलाफ प्रशासन कानूनी कार्रवाई करेगा। उपमंडलाधिकारी चौपाल हेम चंद वर्मा ने कहा श्रद्धालुओं की सुरक्षा और जन हित को देख कर प्रशासन ने कपाट बंद होने के बाद यह निर्णय लिया है। प्रतिबंध के बाद यदि कोई चूड़धार कर यात्रा पर निकला तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। खराब मौसम, बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के कारण हर वर्ष की भांति 1 दिसंबर से आगामी अप्रैल तक श्रद्धालुओं के लिए चूड़धार मंदिर बंद रहेगा।

सर्दियों के दौरान इस क्षेत्र में भारी हिमपात, फिसलन भरी पगडंडियों और अत्यधिक ठंड के कारण चूड़धार मंदिर यात्रा मार्ग खतरनाक हो जाता है। इसके कारण दुर्घटनाओं की संभावना काफी बढ़ जाती है। बीते साल में ऐसे मौसम में कई बार यात्रियों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। इसलिए प्रशासन से इन असुविधाओं को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। एसडीएम ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति की ओर से आदेश की अवहेलना की जाती है तो उसके विरुद्ध नियमों के अनुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से आग्रह किया कि प्रशासनिक आदेशों का पालन करें और सभी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर के कपाट खुलने तक चूड़धार की यात्रा न करें।

 

 

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