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हिमाचल में पंचायत चुनाव तैयारी पर खींचातानी, उपायुक्तों की देरी से नाखुश राज्य निर्वाचन आयोग, सरकार ने दी सफाई

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हिमाचल में पंचायत चुनाव तैयारी पर खींचातानी, उपायुक्तों की देरी से नाखुश राज्य निर्वाचन आयोग, सरकार ने दी सफाई

रजनीश शर्मा। हमीरपुर

 

राज्य में पंचायती राज संस्थाओं के आगामी चुनाव नजदीक आते ही सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के बीच तैयारियों को लेकर खींचातानी तेज हो गई है। आयोग ने जिला उपायुक्तों द्वारा निर्धारित समय पर वोटर लिस्ट प्रकाशित न किए जाने पर कड़ा रुख अपनाते हुए सभी डीसी से जवाब तलब किया है। आयोग का कहना है कि यह सीधे-सीधे चुनाव नियमों का उल्लंघन है और इससे चुनाव कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है।

सूत्रों के मुताबिक निर्वाचन आयोग ने पहले ही जिला प्रशासन को तय शेड्यूल के अनुसार ड्राफ्ट वोटर लिस्ट समय पर जारी करने के निर्देश जारी किए थे, ताकि आपत्तियाँ लेने और संशोधन की प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी की जा सके। लेकिन कई जिलों में लापरवाही सामने आने पर आयोग ने नाराज़गी जताते हुए कहा है कि चुनाव प्रक्रिया में देर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सरकार ने दी सफाई—प्रशासनिक कारणों का हवाला

वहीं सरकार की ओर से कहा गया है कि कुछ जिलों में तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से सूची प्रकाशन में देरी हुई है, लेकिन अब समयबद्ध तरीके से काम पूरा किया जा रहा है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि पंचायत क्षेत्रों के पुनर्गठन और वार्ड पुनर्निर्धारण जैसे कार्यों में अधिक समय लगने के कारण कुछ जिलों में शेड्यूल प्रभावित हुआ।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि चुनाव समय पर करवाना सरकार की प्राथमिकता है, और सभी जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे आयोग के निर्देशों के अनुरूप कार्य सुनिश्चित करें।

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आयोग सख्त—समयबद्ध चुनाव प्रक्रिया पर जोर

राज्य निर्वाचन आयोग ने दोहराया है कि पंचायत चुनाव संविधान द्वारा सुरक्षित लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और इसमें देरी किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं। आयोग ने सभी डीसी को कहा है कि वे जल्द से जल्द देरी के कारणों की रिपोर्ट भेजें और आगामी चरणों के लिए पुख़्ता तैयारी सुनिश्चित करें।

अगले चरणों पर टिकी नज़र

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के प्रकाशन में देरी से अब आगे की समय-सारिणी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। आयोग चाहता है कि आपत्तियों के निपटारे, संशोधित सूची जारी करने और नामांकन प्रक्रिया में कोई रुकावट न आए। वहीं सरकार भी चाहती है कि नए साल से पहले पंचायत चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न हों।

राज्य में पंचायत चुनावों की तैयारी को लेकर सरकार और आयोग दोनों अपने-अपने रुख पर कायम हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर चुनावी प्रक्रिया कितनी सुचारू चलती है, यह आने वाले दिनों में साफ़ होगा।

 

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