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महिला सम्मान समारोह में आशीष शर्मा का प्रहार — “संवेदनहीन सरकार ने जनता की उम्मीदों पर ताले लगा दिए”

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महिला सम्मान समारोह में आशीष शर्मा का प्रहार — “संवेदनहीन सरकार ने जनता की उम्मीदों पर ताले लगा दिए”
रजनीश शर्मा । लंबलू ( हमीरपुर )—

हमीरपुर सदर के विधायक एवं महिला सम्मान समारोह के विशिष्ट अतिथि आशीष शर्मा ने बुधवार को लंबलू में आयोजित भव्य कार्यक्रम में प्रदेश सरकार पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा कि “12 नवंबर 2022 को जनता ने मुझे निर्दलीय विधायक बनाया और 2024 के उपचुनाव में फिर जनता ने अपना आशीर्वाद देकर विधायक बनाया।  आज पूरे प्रदेश में विकास कार्य ठप्प पड़े हैं और लोक कल्याण की योजनाएं बंद पड़ी हैं।”

उन्होंने कहा कि लंबलू कॉलेज और PHC को बंद कर देना सरकार की जनविरोधी मानसिकता को दर्शाता है। “अगर मुख्यमंत्री के जिले में ही संस्थान नहीं खुलेंगे तो नौकरियां कहां से आएंगी? सरकार 58 साल की सेवा देने की बजाय ‘मित्रों’  वाली नौकरियां दे रही है,” आशीष ने तंज कसा।

आशीष शर्मा ने कहा कि संवेदनहीन सरकार ने हिमकेयर, मुख्यमंत्री शगुन योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाएं बंद कर दीं, बीपीएल कार्ड काट दिए और महिलाओं को 1500 रुपये की घोषणा आज तक पूरी नहीं हुई। “दस गारंटियों में से कोई गारंटी पूरी नहीं हुई,” उन्होंने व्यंग्य में कहा।

उन्होंने कहा, “मैं महादेव का भक्त हूं और फकीरी में जीवन जीता हूं। विकास की बेड़ियां टूटने का समय आ गया है। अब जनता और मातृशक्ति तय करेगी कि आगे किसकी सरकार बनेगी। जयराम जी के नेतृत्व में भाजपा हमीरपुर की सभी पांचों सीटें जीतेगी और प्रदेश में फिर भाजपा सरकार बनेगी।”

विधायक ने बताया कि उन्हें जो विधायक निधि मिली, वह पूरी तरह जनता के हित में खर्च की गई। “अपने निजी धन से 400 सोलर लाइटें लगाईं, 42 जरूरतमंद बच्चियों को 1.5 लाख रुपये की पेंशन लगवाई। मैं राजनीति में जनता की सेवा के लिए आया हूं, अपना घर भरने के लिए नहीं।”

उन्होंने कहा कि सरकार ने आते ही हजारों संस्थानों पर ताले जड़ दिए। “मुख्यमंत्री की गरिमा को पहले के सभी मुख्यमंत्रियों ने समझा, पर आज स्थिति अलग है। झूठे मुकदमों और संकीर्ण मानसिकता से सरकार चल रही है।”

आशीष शर्मा ने मंच विवाद पर भी कटाक्ष करते हुए कहा, “पूरा पंचायत क्षेत्र परमिशन देने के पक्ष में था, लेकिन पंचायत प्रधान की कुछ मजबूरियां रही होंगी। दो मंच लगने पड़े — यह स्थिति बताती है कि लोकतंत्र कितना संकीर्ण हो गया है।”

उन्होंने कहा कि बस स्टैंड की पहली मांग मुख्यमंत्री के साथ उन्होंने की थी और मुख्यमंत्री ने इस मांग को सार्वजनिक मान भी लिया थे  वरना यह प्रोजेक्ट भी ठंडे बस्ते में चला जाता।

अंत में उन्होंने कांग्रेस सरकार की गारंटियों को याद करवाते हुए व्यंग्य कसा — “गारंटियां सिर्फ कागजों पर हैं, जनता अब जवाब देने को तैयार है।”

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