best news portal development company in india

भोरंज में भाजपा की अंदरूनी जंग तेज — टिकट तिकड़ी की तकरार से कांग्रेस को मिल सकता है सीधा फायदा

SHARE:

भोरंज में भाजपा की अंदरूनी जंग तेज — टिकट तिकड़ी की तकरार से कांग्रेस को मिल सकता है सीधा फायदा

रजनीश शर्मा । हमीरपुर

भोरंज विधानसभा क्षेत्र में 2027 से पहले ही राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। भाजपा के भीतर टिकट को लेकर उभर रही त्रिकोणीय दावेदारी ने पार्टी में असमंजस और असंतोष दोनों पैदा कर दिए हैं। कमलेश कुमारी, पवन कुमार और डॉ. अनिल धीमान—तीनों की सक्रियता और गुटीय खींचतान अब खुलकर सतह पर दिखाई देने लगी है।

टिकट कटने की कसक और 60 वोटों की हार का दर्द

भाजपा ने 2022 के चुनाव में अचानक कमलेश कुमारी का टिकट काटकर डॉ. अनिल धीमान को मैदान में उतारा था। लेकिन यह दांव सफल नहीं हुआ, और 60 वर्ष की उम्र में चुनाव लड़ रहे डॉ. धीमान कांग्रेस के सुरेश कुमार से सिर्फ 60 वोटों से हार गए। यह परिणाम भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराज़गी और असंगठित रणनीति का प्रतीक माना गया।

संघ के समीकरण बनाम उम्र का फैक्टर

भोरंज में 2027 के लिए जो माहौल बन रहा है, उसमें दो चीजें मुख्य हैं:

 

1. संघ की पसंद और पकड़

कमलेश कुमारी और पवन कुमार, दोनों की संघ से मजबूत नजदीकियां बताई जा रही हैं।

स्थानीय स्तर पर दोनों के समर्थक सक्रिय हैं, जिससे संगठन में ध्रुवीकरण की स्थिति बन रही है।

2. उम्र का गणित

डॉ. अनिल धीमान की उम्र अब टिकट आबंटन में निर्णायक फैक्टर बन सकती है।

भाजपा उच्च नेतृत्व हाल के वर्षों में “युवा चेहरे” और “ऊर्जा वाले उम्मीदवार” को प्राथमिकता दे रहा है।

इसलिए माना जा रहा है कि संघ की पसंद और उम्र—दोनों ही मिलकर टिकट का रुख तय करेंगे।

ये भी पढ़ें : हाईकोर्ट ने एचआरटीसी के अनुबंध परिचालकों को समकक्षों के बराबर नियमितीकरण का लाभ देने का दिया आदेश

अंतर्कलह से कांग्रेस विधायक को बढ़त

भाजपा में चल रही खुली खींचतान ने कांग्रेस विधायक सुरेश कुमार को स्वाभाविक राजनीतिक लाभ दिलाना शुरू कर दिया है।

वर्तमान विधायक का जनसंपर्क मजबूत है।

भाजपा में एक नाम के पक्ष में सर्वसम्मति न बन पाने का सीधा असर वोट-बैंक पर पड़ सकता है।

यदि भाजपा एकजुट नहीं हुई, तो 2027 में कांग्रेस को बढ़त मिल सकती है, जैसा 2022 में हुआ था।

भाजपा हाईकमान के लिए चुनौती

* भोरंज हमेशा से निर्णायक और रणनीतिक सीट रही है।

* तीनों दावेदारों के अपने-अपने क्षेत्रीय नेटवर्क हैं।

* हाईकमान के सामने चुनौती है कि वह टिकट ऐसे व्यक्ति को दे जो न केवल जीत दिला सके बल्कि पार्टी के अंदर खींचतान कम कर सके।

भोरंज—2027 का ट्रेलर शुरू

भोरंज में इस बार मुकाबला सिर्फ भाजपा बनाम कांग्रेस नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर भी ‘तीन तरफा जंग’ का रूप ले चुका है।

संघ के समीकरण

* उम्र का फैक्टर

* 2022 की टिकट राजनीति

* और 60 वोटों की हार

ये सभी मिलकर 2027 को बेहद दिलचस्प और तनावपूर्ण बना रहे हैं।

 

Leave a Comment

error: Content is protected !!

Follow Us Now