
दीपावली की तिथि – शास्त्र एवं ज्योतिष का आधार 20 अक्तूबर ही है : पंडित राजीव शर्मा
रजनीश शर्मा । हमीरपुर
सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि हिंदू पंचांग (लूनर कैलेंडर) में त्योहारों की तिथियाँ केवल चंद्र तिथि, ग्रह स्थिति, मुहूर्त आदि का सम्मिलित परिणाम होती हैं। दीपावली (लक्ष्मी पूजा) को कार्तिक महीने की अमावस्या (अमावस्या तिथि) की संध्या या रात में ही करना कहा गया है। लेकिन इस वर्ष (2025) में एक विशेष स्थिति है:

इस वर्ष अमावस्या तिथि (नव चंद्र तिथि) 20 अक्टूबर को लगभग दोपहर में 3:44 बजे से आरंभ हो रही है और अगले दिन, 21 अक्टूबर को शाम तक 5:54 बजे तक बनी रहेगी। इस बारे हमीरपुर गांधी चौक स्थित पंडित राजीव शर्मा ने हमने विस्तृत चर्चा की और उन्होंने ज्योतिष विज्ञान के आधार पर यह जानकारी दी ….

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उन्होंने बताया कि यहाँ समस्या यह है कि अमावस्या आरंभ (शाम होने से पहले) हो रही है — अर्थात् अमावस्या की शुरुआत शाम से पहले हो रही है — इसलिए वही रात दीवाली का रात माना जाना चाहिए।
शास्त्रों में एक महत्वपूर्ण नियम है: “प्रदोष व्यापिनी अमावस्या” (Pradosh Vyāpini Amāvasyā) — अर्थात् यदि अमावस्या प्रदोषकाल (शाम से लेकर थोड़ी देर पश्चात) के समय विद्यमान हो, तो उसी रात दीपोत्सव यानी दिवाली करना चाहिए।
इस कारण, 20 तारीख की शाम (प्रदोषकाल) में अमावस्या पहले से चल रही है — अतः वो रात शास्त्र अनुसार दीपावली मनाने की अधिक उपयुक्त मानी जाती है।
यदि अमावस्या तिथि केवल अगले दिन की शाम से शुरू होती या प्रदोषकाल के बाहर शुरू होती, तो अगले दिन की रात को दीपावली मनाना शास्त्र में सही माना जाता। लेकिन इस वर्ष वह स्थिति नहीं है।
इसीलिए इस वर्ष 20 अक्टूबर को ही दीपावली तय हैं। इसलिए, शास्त्र एवं ज्योतिष की दृष्टि से इस वर्ष दीपावली 20 को ही मनाने का तर्क यह है कि अमावस्या पहले ही शाम तक शुरू हो गई है, और प्रदोषकाल के समय अमावस्या विद्यमान है — इसी आधार पर उस रात को दीपोत्सव करना उपयुक्त माना जाता है।


Author: Polkhol News Himachal









