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एनएच 03 के अवैज्ञानिक तरीके से पहाड़ काटने, गुणवत्ता और लेट लतीफी का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, आज सुनवाई

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एनएच 03 के अवैज्ञानिक तरीके से पहाड़ काटने, गुणवत्ता और लेट लतीफी का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, आज सुनवाई

रजनीश शर्मा। हमीरपुर

विवादों से घिरे नेशनल हाइवे नंबर 03 की गुणवत्ता, लेटलतीफी, एलाइनमेंट तथा अवैतनिक तरीके से पहाड़ काटने का मामला अब हाइकोर्ट पहुंच गया है। मामले की आज सुनवाई हो रही हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग-003 (अटारी-लेह) के हमीरपुर से मंडी खंड के निर्माण कार्य में कथित अवैज्ञानिक कटाई और लापरवाही को लेकर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका डॉ. अनुपमा सिंह निवासी देवधार ने केंद्र सरकार व अन्य संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध दायर की गई है। 10 अक्तूबर को हाईकोर्ट में सुनवाई हो रही है।

दायर याचिका के तथ्यों के अनुसार तल्याहड़ से लगधर के बीच एनएच-003 के निर्माण कार्य में पहाड़ियों की अवैज्ञानिक कटाई, नालों में मलबा फेंकने, और प्राकृतिक जलधाराओं के प्रवाह को मोड़ने जैसी गंभीर अनियमितताएं की जा रही हैं। इन कारणों से क्षेत्र में भूस्खलन, कृषि भूमि और मकानों को नुकसान तथा ‘जन संपत्ति को भारी क्षति पहुंची है। याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने इस विषय पर पहले भी कई बार आवाज उठाई थी और सितंबर 2024 में प्रदर्शन भी किया था। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और राज्य मंत्री अजय टम्टा से भी मुलाकात कर मामला उठाया था। उन्होंने बताया कि तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद सड़क निर्माण कार्य अधूरा है। अभी तक लगभग 20 फीसदी कार्य पूरा हुआ है।

 

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गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। याचिका में मांग की गई है कि एक स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच समिति गठित करे, जो परियोजना की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रगति का मूल्यांकन करे। बता दें कि निर्माणाधीन एनएच 003 वाया हमीरपुर , आवाहदेवी , सरकाघाट, कोटली, धर्मपुर से होकर गुजरता है। इन दिनों इस एनएच के चौड़ीकरण का कार्य जारी है। पूर्व में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) के अधिकारियों की मनमानी के खिलाफ धर्मपुर विधायक चंद्रशेखर भी नौ दिन तक आमरण अनशन पर बैठ चुके हैं। इसके बाद मोर्थ की पीआईयू हमीरपुर को खत्म करते हुए शिमला मेंनई पीआईयू स्थापित की गई थी। अब भी कई जगह बिना डंगे लगाए मलबे के ढेर पर एन एच निर्माण कार्य जारी है। कई नए बनाए बाई पास डंगे गिरने और मलबा बहने से बंद पड़े हैं।

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