
Dussehra celebrations : कुल्लू समेत किन शहरों का दशहरा देखे बगैर अधूरा है आपका विजयादशमी उत्सव …. ?
पोल खोल न्यूज़ डेस्क | हमीरपुर
दशहरा या फिर कहें विजयादशी का पावन पर्व सिर्फ सनातन परंपरा से जुड़ी आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की लोक संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है। यह पर्व हर साल आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है और इस त्यौहार को ‘विजयादशमी’ के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है और इसलिए देशभर में इसे अलग-अलग रूपों में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
दशहरे का सबसे लोकप्रिय रूप उत्तर भारत में देखने को मिलता है, जहां रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के विशाल पुतलों का दहन किया जाता है। इस आयोजन से पहले रामलीला का मंचन होता है, जिसमें मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन इससे इतर भारत के तमाम शहरों में इसी दशहरे का अलग ही आकर्षण देखने को मिलता है। आइए जानें भारत के विभिन्न शहरों में मनाए जाने वाले दशहरे की खास बातें और उससे जुड़ी परंपराओं के बारे।
मैसूर (कर्नाटक) का शाही दशहरा

कुल्लू (हिमाचल प्रदेश) का अंतरराष्ट्रीय दशहरा
राम की महिमा में रमा उत्तर भारत का दशहरा
बस्तर (छत्तीसगढ़) का विशेष दशहरा

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा
पश्चिम बंगाल में दशहरा और दुर्गा पूजा एक दूसरे का पर्याय माने जाते हैं। नवरात्रि के नौ दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा होती है और दशमी के दिन उनकी प्रतिमा को विसर्जित किया जाता है। खास बात यह है कि इस दिन महिलाएं ‘सिंदूर खेला’ नामक रस्म निभाती हैं, जिसमें वे एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर देवी दुर्गा को विदाई देती हैं। कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में बने भव्य पंडाल, मूर्तियों की कलाकारी और सांस्कृतिक कार्यक्रम यहां का मुख्य आकर्षण होते हैं।
विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश) का दशहरा
विजयवाड़ा में कनक दुर्गा मंदिर में दशहरे के समय विशेष आयोजन होते हैं। यहां देवी को दस दिनों तक विभिन्न रूपों में सजाया जाता है। हर दिन का एक विशेष रूप होता है, जैसे बालात्रिपुरसुंदरी, अन्नपूर्णा, दुर्गा, काली आदि। यहां देवी के दर्शन और पूजन के लिए बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंचते हैं।

गुजरात और महाराष्ट्र की परंपराएं
गुजरात और महाराष्ट्र में दशहरे के समय डांडिया की धूम रहती है। यहां नवरात्रि की शुरुआत से ही गरबा और डांडिया प्रारंभ हो जाता है। जिसमें लोग रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर रातभर नृत्य करते हैं। महाराष्ट्र में लोग दशहरे के दिन को बेहद खास माना जाता है। इस दिन लोग जहां नए कार्यों की शुरुआत करते हैं, वहीं इस दिन शस्त्रों की विशेष रूप से पूजा भी की जाती है।
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Author: Polkhol News Himachal









